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डायबिटीज़ को लेकर चेतावनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कई संगठनों ने चेतावनी दी है कि जिस रफ़्तार से बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है उससे डायबिटीज़ यानी मधुमेह की बीमारी बढ़ सकती है और आर्थिक विकास पर असर पड़ सकता है. विश्व डायबिटीज़ डे पर यह चेतावनी विश्व स्वास्थ्य संगठन और इंटरनेशनल डायबिटीज़ फ़ेडरेशन ने जारी की है. उनका कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों में से 10 प्रतिशत मोटापे के शिकार हैं और स्थिति ख़राब होती जा रही है. अनुमान है कि दुनिया भर में इस समय दो करोड़ बीस लाख पाँच साल से कम उम्र के बच्चे मोटापे के शिकार हैं और ये बच्चे सिर्फ़ विकसित देशों के नहीं हैं. इनमें से एक करोड़ सत्तर लाख बच्चे विकासशील देशों के हैं. उन बच्चों को मोटापे के कारण होने वाले डायबिटीज़ का ख़तरा है. इसे सामान्य रुप से टाईप-टू डाइबिटीज़ कहा जाता है. आमतौर पर इस तरह की डायबिटीज़ उम्र ज़्यादा होने के बाद ही होती थी लेकिन ख़राब खानपान और घटती शारीरिक गतिविधियों के कारण अब यह बच्चों और युवाओं को भी होने लगी है. डायबिटीज़ और मोटापा यदि साथ-साथ रहा तो हृदय रोग, दिल का दौरा, कैंसर और अलज़ेमर्स जैसे रोग हो सकते हैं. इन संगठनों का कहना है कि मोटापे से होने वाली महामारी को रोका जा सकता है. उनके अनुसार जीवन शैली में मामूली परिवर्तन से स्थिति सुधर सकती है, जैसे कि स्कूल में शीतल पेय पदार्थों पर रोक लगा दी जाए, खेलकूद की गतिविधियाँ बढ़ा दी जाएँ और कम उम्र में ही उचित भोजन की शिक्षा दी जाए तो डायबिटीज़ से बचा जा सकता है. |
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