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चीन हो सकता है स्पैमर नंबर वन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन आने वाले दिनों में सबसे अधिक जंक मेल या स्पैम भेजने वाले देशों की श्रेणी में पहले नंबर पर पहुंच सकता है. नए आकड़ों के अनुसार चीन इस मामले में अमरीका को पीछे छोड़ सकता है जहां से फ़िलहाल सबसे अधिक जंक मेल भेजे जाते हैं. इंटरनेट सिक्योरिटी फर्म सोफोस के अनुसार इस समय अमरीकी कंप्यूटरों से 23.1 प्रतिशत जंक मेल आ रहे हैं जबकि चीन के कंप्यूटरों से 21.9 प्रतिशत जंक मेल भेजे जाते हैं. इस सूची में ब्रिटेन का नंबर दसवां है जबकि अगर सबसे बड़े स्रोत की बात की जाए तो एशिया से 40 प्रतिशत जंक मेल भेजे जाते हैं. सोफोस के वरिष्ठ तकनीकी सलाहकार ग्राहम क्लूले बताते हैं कि 2004 में दुनिया भर में जितने स्पैम या जंक मेल भेजे गए उसका 50 प्रतिशत अमरीका से आया था. क्लूले के अनुसार इसमें अब कमी आई है क्योंकि अमरीका में इस संबंध में क़ानून कड़े किए गए हैं. वो कहते हैं " अमरीका में स्पैम या जंक मेल भेजने वाले कई लोगों को सज़ा मिली है लेकिन यहां ज़रुरी बात यह है कि ये स्पैमर दुनिया में कहीं भी हो सकते हैं. " स्पैम भेजने वालों की श्रेणी में तीसरे नंबर पर दक्षिण कोरिया और चौथे नंबर पर फ्रांस है जबकि भारत को शीर्ष दस देशों की सूची मे स्थान नहीं मिला है. आंकड़ों के अनुसार प्रति दिन 13 अरब स्पैम मेले भेजे जाते हैं जिसमें से 70 प्रतिशत स्पैम तो दूसरों के कंप्यूटरों को हाईजैक करके भेजे गए. यानी जिसके कंप्यूटर से भेजे गए उसे पता तक नहीं कि उसके कंप्यूटर से वायरस वाले मेल भेजे जा रहे हैं. सोफोस के अधिकारी कहते हैं कि स्पैम भेजने की प्रवृति अमरीका में भले ही कम हो रही हो लेकिन अन्य देशों में इसके बढ़ते प्रचलन के ख़तरे बहुत हैं. उनका कहना है कि जर्मनी, फ्रांस और पोलैंड में पिछले छह महीनों में स्पैम मेल भेजने वालों की संख्या बढ़ी है. | इससे जुड़ी ख़बरें कंप्यूटर हैकर ने की क्रेडिट कार्ड में घुसपैठ20 जून, 2005 | कारोबार 'विंडोज़ विस्टा' 2006 में बाज़ार में आएगा24 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना चाभी वाला लैपटॉप सिर्फ़ 100 डॉलर में29 सितंबर, 2005 | विज्ञान भारत में कंप्यूटर बिक्री 36 प्रतिशत बढ़ी06 जनवरी, 2006 | कारोबार डेढ़ सौ साल बाद तार सेवा बंद हुई07 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान नए ज़माने का ओरिगैमि कंप्यूटर09 मार्च, 2006 | विज्ञान साइबर अपराधियों ने डाला बीबीसी का चारा01 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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