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'जलवायु परिवर्तन का कारण सूर्य नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिकों ने सबूत दिए हैं कि आजकल जलवायु में आ रहे परिवर्तन के पीछे सूर्य में चल रही गतिविधियों आया कोई बदलाव नहीं है. इस नए अध्ययन के निष्कर्षों से जलवायु परिवर्तन के बारे में उन प्रचलति धारणाओं को धक्का लगा है जिनके अनुसार पृथ्वी पर अंतरिक्ष से आने वाली किरणें बादलों और पृथ्वी के तापमान को तय करती हैं. इसके अनुसार सूर्य में चल रही गतिविधियों में आने वाला परिवर्तन धरती पर आने वाली अंतरिक्षीय किरणों की सघनता को प्रभावित करता है. लेकिन लैंकैस्टर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पिछले 20 वर्षों में अंतरिक्षीय किरणों इनके बीच कोई संबंध नहीं मिला है. इस शोध का नेतृत्व करने वाले विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक का कहना है कि इस सब का मतलब ये है कि ग्रीनहाउस गैसों को घटाने के प्रयास जारी रहने चाहिए. नया अध्ययन इस निष्कर्ष को इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़िजिक्स के जर्नल एनवायरमेंटल रिसर्च लेटर में प्रकाशित किया गया है. इसमें वैज्ञानिकों ने बताया है कि उन्होंने अपने शोध के दौरान तीन अलग-अलग तरीक़े अपनाए. अंतरिक्षीय किरणों के नियम को डेनमार्क के वैज्ञानिक हेनरिक स्वेनमार्क ने डैनिश नेशनल स्पेस सेंटर (डीएनएससी) में प्रतिपादित किया था. लैनकॉस्टर विश्वविद्यालय के टेरी सालोन ने बताया, "हमने इस अध्ययन को स्वेनमार्क के अध्ययन के कारण ही शुरू किया था." सालोन के अनुसार, "अगर स्वेनमार्क सही थे तो हम कार्बन के उत्सर्जन को कम करने के लिए अपनाए गए काफ़ी महंगे तरीकों के साथ ग़लत रास्ते पर जा रहे थे. अगर वह सही थे तो हमें कार्बन उत्सर्जन से कोई फ़र्क नहीं पड़ना चाहिए." आवेशित कण अंतरिक्षीय किरणों को हमारे ग्रहों का चुंबकीय क्षेत्र धरती से मोड़ देता है. सौर हवाओं के कारण विद्युत आवेशित कण सूर्य से आते हैं. स्वेनमार्क की अवधारणा यह थी कि जब सौर हवाएं कमज़ोर पड़ती हैं तो धरती पर आने वाली अंतरिक्षीय किरणों की मात्रा बढ़ जाती है. इससे वायुमंडल में और अधिक आवेशित कण बनते हैं, जिससे बादल बनते हैं और वातावरण ठंडा होता है. तापमान का बढ़ना जब सूर्य से किरणों का उत्सर्जन अधिक होता है तो तापमान बढ़ता है. प्रोफ़ेसर सलोन ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि सूर्य जब 'डकार' लेता है तो वह धरती पर बड़ी मात्रा में आवेशित कण फेंकता है. उन्होंने बताया - "हम हम यह देखना चाहते थे कि जब सूर्य से इस तरह की किरणें आती हैं तो क्या बादलों की मात्रा बढ़ जाती है? लेकिन हमने ऐसा कुछ नहीं देखा. सूर्य के 11 वर्षों के एक प्राकृतिक चक्र के बाद अंतरिक्षीय किरणों की सघनता और बादलों के छाने में एक कमज़ोर अंर्तसंबंध दिखता है. लेकिन अगले चक्र में इस तरह का कोई अंर्तसंबध नहीं दिखा." |
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