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सोमवार, 10 दिसंबर, 2007 को 12:28 GMT तक के समाचार
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'जलवायु परिवर्तन से हो सकता है युद्ध'
प्रदर्शनकारी
जलवायु परिवर्तन के कारण संघर्षों की चेतावनी पहले भी कई शोधों में दी जा चुकी है
इंडोनेशिया के बाली में चल रहे जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसके अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण अफ्रीका और एशिया में तनाव हो सकता है जिसकी परिणति युद्ध में हो सकती है.

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि दक्षिण एशिया में ख़ासकर भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश में जलवायु परिवर्तन युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकता है क्योंकि इन इलाक़ों में ग्लेशियरों के टूटने के कारण पानी की कमी हो रही है और लोगों की दिक्कतें बढ़ रही हैं.

इस रिपोर्ट में राजनेताओं से अपील की गई है वो ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने की दिशा में तत्काल क़दम उठाएं ताकि ग़रीब देश जलवायु परिवर्तन के घातक परिणामों का सामना कर सकें.

जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड के वैज्ञानिकों के शोध के अनुसार जिस तरह से पूरी दुनिया का तापमान बढ़ रहा है उससे अफ्रीका और दक्षिण एशिया के देशों में युद्ध के आसार बन रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार इन इलाक़ों में भूमि और जल संसाधनों को लेकर संघर्ष हो सकता है जिससे बड़े पैमाने पर पलायन हो सकता है.

रिपोर्ट लिखने वालों में से एक का कहना है कि अगर तापमान में पांच डिग्री की बढ़ोतरी होती है तो विश्व स्तर पर कई स्थानों पर छोटे मोटे संघर्ष शुरु हो जाते हैं.

रिपोर्ट कहती है कि राजनेताओं को न केवल ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी करने की ज़रुरत है बल्कि उन्हें उन ग़रीब देशों की मदद करने के लिए भी आगे आना चाहिए जो जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे हैं.

यह नया शोध ऐसे समय में आया है जब इससे पहले कई और शोध कार्यों में यह बात कही गई है कि जलवायु परिवर्तन के ख़तरनाक परिणाम सामने आ सकते हैं.

इस रिपोर्ट में कई ऐसी स्थितियां दिखाई गई हैं जिसमें संघर्ष बढ़ सकता है, मसलन साफ पानी की कमी, खाद्दान्न उत्पादन में कमी, आंधी तूफान की संख्या में बढ़ोतरी कुछ ऐसी आपदाएं हैं जो संघर्ष बढ़ा सकते हैं.

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