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शनिवार, 08 सितंबर, 2007 को 10:49 GMT तक के समाचार
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जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सहमति
बुश
काफ़ी विचार-विमर्श के बाद सहमति बन पाई है
चीन और अमरीका पहली बार ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए बने लक्ष्यों को मानने के लिए तैयार हुए हैं.

ऑस्ट्रेलिया में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के नेताओं की बैठक चल रही है और ये सहमति उसी दौरान हुई.

एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग फ़ोरम (एपेक) के बयान पर 21 देशों ने हस्ताक्षर किए हैं लेकिन इसमें कोई ठोस क़दम उठाने के बात नहीं की गई है.

चीन और अमरीका सबसे ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाले देशों में से हैं. बयान में कहा गया है कि ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल हो और ज़्यादा पेड़ लगाए जाएँ.

इस बात पर भी सहमति हुई कि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने की रणनीति हर देश के 'आर्थिक और सामाजिक माहौल' में फ़र्क़ को ध्यान में रखेगी.

बयान में कहा गया," ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने, फिर रोकने और फिर इसकी दिशा बदलने की ज़रूरत है".

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि चीन और अमरीका पहली बार ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर वैश्विक लक्ष्यों को मानने पर तैयार हुए हैं.

प्रदर्शन

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड ने इसे अंतरराष्ट्रीय समझौता होने की दिशा में अहम क़दम बताया है.

जॉन हॉवर्ड ने कहा, हम जलवायु परिवर्तन के मुद्दे से निपटने के बारे में गंभीर हैं, अपने-अपने देशों की आर्थिक ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए.

पर्यावरणविदों का कहना है कि ये सहमती सांकेतिक ज़्यादा है. ग्रीनपीस के मुताबिक ये सहमति ध्यान हटाने का एक तरीका है.

ग्रीनपीस की प्रवक्ता का कहना था, "विकसित देशों के लिए कोई निश्चित और बाध्य लक्ष्य नहीं दिए गए हैं, उसके बगैर तो ये सिर्फ़ एक राजनीतक दिखावा है".

सिडनी में जारी बयान में चीन और अन्य विकासशील देशों की ये बात भी शामिल की गई है कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर बातचीत संयुक्त राष्ट्र के तहत हो.

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर हुई इस बैठक को देखते हुए सिडनी में कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं.

शनिवार को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुई हैं हालांकि आमतौर पर माहौल शांतिपूर्ण रहा.

संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के तहत दिसंबर में बाली में बातचीत होगी. एपेक के 21 सदस्य हैं जिसमें रूस और जापान भी शामिल है. ये 21 देश मिलकर कुल 60 फ़ीसदी ग्रीनहाउस गैसें उत्सर्जित करते हैं.

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