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बुश उत्सर्जन पर नए लक्ष्य के पक्ष में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने जलवायु परिवर्तन पर दुनिया के सबसे अधिक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन करनेवाले देशों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है. इसमें भारत और चीन शामिल हैं. राष्ट्रपति बुश अगले डेढ़ साल में इस मुद्दे पर एक समझौता चाहते हैं. बुश का कहना था,'' वो चाहते हैं कि अमरीका और 14 अन्य देशों को एक साथ लाकर उत्सर्जन के लिए सन् 2008 तक एक लक्ष्य निर्धारित किया जाए.'' राष्ट्रपति बुश ने यह बात जी-8 बैठक से पहले कही है जिसमें जलवायु परिवर्तन एक प्रमुख मुद्दा बनने जा रहा है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जलवायु परिवर्तन को लेकर राष्ट्रपति बुश के लहजे में अचानक परिवर्तन आया है क्योंकि अभी तक वो उत्सर्जन के लक्ष्य को ख़ारिज करते आए हैं. दूसरी ओर पर्यावरणवादी राष्ट्रपति बुश की योजना को नकारते हैं. उनका कहना है कि यह अमरीका की जलवायु परिवर्तन को लेकर संभावित दबाव से बचने की कोशिश है. अमरीकी रुख़ में परिवर्तन ग़ौरतलब है कि इसके पहले अमरीका ने हानिकारक गैसों का उत्सर्जन रोकने के जी-8 के मसौदे को ख़ारिज कर दिया था. जर्मनी ने ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के लिए एक प्रारूप तैयार किया है जिसे विकसित औद्योगिक देशों के समूह जी-आठ की बैठक में अगले महीने पेश किया जाना है. जर्मनी चाहता है कि जी-8 के सदस्य देश एक नियत समयसीमा में ग्रीनहाउस गैसों में बड़ी कटौती के लिए तैयार हो जाएँ. उल्लेखनीय है कि अमरीका ने क्योटो प्रोटोकॉल, 2001 पर भी हस्ताक्षर नहीं किए है. इस संधि के तहत वर्ष 2012 तक उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. वैज्ञानिक पहले ही यह चिंता व्यक्त कर चुके हैं कि अगर तुरंत कुछ नहीं किया गया तो दुनिया को बचाना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा. चिंता इस बात को लेकर भी है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो ऐसे परिवर्तन होने शुरू हो जाएँगे जिनको पलटा नहीं जा सकेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें 'इस बार सामान्य से कुछ कम बारिश'19 अप्रैल, 2007 | विज्ञान वनों से बढ़ता पृथ्वी का तापमान!10 अप्रैल, 2007 | विज्ञान जलवायु परिवर्तन का असर करोड़ों पर06 अप्रैल, 2007 | विज्ञान ब्रिटेन में कार्बन प्रदूषण में कमी की पहल13 मार्च, 2007 | पहला पन्ना 'युद्ध जितना ख़तरनाक है जलवायु परिवर्तन'02 मार्च, 2007 | पहला पन्ना बढ़ते पारे के लिए मानव ज़िम्मेदार02 फ़रवरी, 2007 | विज्ञान जलवायु परिवर्तन के 'गंभीर परिणाम' होंगे15 मई, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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