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'युद्ध जितना ख़तरनाक है जलवायु परिवर्तन' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन से दुनिया को युद्ध जितना ही ख़तरा है. जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अपने पहले भाषण में बान की मून ने कहा, ''पर्यावरण में बदलाव भविष्य में युद्ध और संघर्ष की बड़ी वजहें बन सकते हैं.'' संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने सबसे अधिक ग्रीनहाउस गैस छोड़ने वाले अमरीका से अपील की कि वह ग्लोबल वार्मिंग के ख़िलाफ़ अभियान का नेतृत्व करे. बान की मून ने कहा कि वो औद्योगिक देशों के समूह जी-8 के नेताओं से इस मसले पर जून में बात करेंगे. संयुक्त राष्ट्र दिसंबर में बाली में जलवायु परिवर्तन पर एक सम्मेलन भी आयोजित कर रहा है. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के एक कांफ्रेंस में बच्चों को संबोधित करते हुए बान की मून ने कहा, ''मेरी पीढ़ी पृथ्वी को लेकर कुछ लापरवाह रही लेकिन मुझे उम्मीद है कि हालात अब बदल रहे है.'' उन्होंने कहा, ''संयुक्त राष्ट्र अभी भी मुख्य रूप से युद्ध रोकने और इसे ख़त्म करने पर ही ध्यान देता है. लेकिन युद्ध से मानवता को जितना नुकसान पहुँचता है उतना ही जलवायु संकट और ग्लोबल वार्मिंग से होगा.'' अमरीकी भूमिका बान की मून ने कहा कि अफ्रीका और छोटे द्वीपों पर रह रहे लोग ग्लोबल वार्मिँग की वजह से सबसे अधिक प्रभावित होंगे, जबकि इसके लिए वे सबसे कम ज़िम्मेदार हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि पर्यावरण में बदलाव से सूखा और बाढ़ आएंगे, जिसके चलते संघर्ष बढ़ सकता है. ग़ौरतलब है कि पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र की ओर से जलवायु परिवर्तन पर जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि ग्लोबल वार्मिंग के लिए मानवीय गतिविधियाँ ज़िम्मेदार हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि वर्ष 2100 तक समुद्र का जलस्तर 28 से 43 सेंटीमीटर तक बढ़ जाएगा. साथ ही यह आशंका भी जताई गई थी कि अगले सौ साल के दौरान पृथ्वी का औसत तापमान लगभग तीन डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा. बान की मून ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग पर क्योटो संधि की अवधि ख़त्म होने से पहले इसके लक्ष्य को हासिल करने के लिए दुनिया में बेहतर समन्वय की जरूरत है. क्योटो संधि के अनुसार औद्योगिक देशों को वर्ष 2012 तक ग्रीनहाउस गैसों, विशेष तौर पर कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को अगले दस साल में पाँच प्रतिशत के स्तर से नीचे लाना है. उन्होंने कहा,''मुझे उम्मीद है प्रदूषण रहित ऊर्जा के लिए अत्याधुनिक तकनीक ईजाद करने में अपनी भूमिका निभाने वाला अमरीका इस महत्वपूर्ण मसले पर भी नेतृत्व करेगा.'' ग़ौरतलब है कि अमरीका कुल ग्रीन हाउस गैस का एक-चौथाई हिस्सा उत्सर्जित करता है लेकिन उसने क्योटो संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है. | इससे जुड़ी ख़बरें जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सहमति 15 फ़रवरी, 2007 | विज्ञान बढ़ते पारे के लिए मानव ज़िम्मेदार02 फ़रवरी, 2007 | विज्ञान यूरोप के लिए नई ऊर्जा रणनीति10 जनवरी, 2007 | विज्ञान प्रदूषण में कटौती पर ठोस निर्णय नहीं18 नवंबर, 2006 | विज्ञान जलवायु परिवर्तन से 'अफ़्रीका में संकट'29 अक्तूबर, 2006 | विज्ञान जलवायु परिवर्तन के 'गंभीर परिणाम' होंगे15 मई, 2006 | विज्ञान ग्लोबल वॉर्मिंग और भारत पर ख़तरा19 अप्रैल, 2006 | विज्ञान 'माँट्रियाल सम्मेलन से कोई उम्मीद नहीं'27 नवंबर, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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