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जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सहमति | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका, यूरोप, अफ़्रीका और एशियाई देशों के प्रमुख राजनेता जलवायु परिवर्तन से निपटने के तरीकों पर सहमत हो गए हैं. वॉशिंगटन में दो दिन की बातचीत के बाद प्रतिनिधियों में इस बात पर सहमति हुई है कि विकसित देशों के साथ साथ विकासशील देशों के लिए भी गैस उत्सर्जन के लक्ष्य निर्धारित किए जाएँ. इस सम्मेलन का उद्देश्य जून में जर्मनी में होनेवाली जी-8 देशों की बैठक से पहले जलवायु परिवर्तन पर एक सहमति बनाना था. जर्मनी की बैठक में भारत, चीन, ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीका भी हिस्सा लेंगे. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस सम्मेलन की सहमति अहम है क्योंकि क्योटो समझौता 2012 में समाप्त हो रहा है. पर्यावरणवादियों की चिंता पर्यावरणवादियों की चिंता यह रही है कि क्योटो संधि की समाप्ति का समय निकट आता जा रहा है लेकिन पर्यावरण के लिए घातक ग्रीनहाउस गैस का रिसाव कम करने के लिए लक्ष्य निर्धारित नहीं किए गए हैं. संवाददाता का कहना है कि हालांकि वॉशिंगटन की घोषणा बाध्यकारी नहीं है लेकिन यह विभिन्न देशों के सोच में परिवर्तन का संकेत देती हैं. साथ ही इसे अमरीका का भी समर्थन हासिल है. ग़ौरतलब है कि इसके पहले जलवायु परिवर्तन को लेकर केन्या की राजधानी नैरोबी में हुआ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ग्रीन हाउस गैसों का रिसाव रोकने के लिए कोई कार्यक्रम तय किया बिना ख़त्म हो गया था. हालांकि इस सम्मेलन में दुनिया भर के देशों ने क्योटो संधि के वायदों को पूरा करने के लिए सहमति जताई थी. विकासशील देशों की चिंता यह है कि विकसित देश उन पर ग्रीनहाउस गैसों का रिसाव रोकने के लिए दबाव बढ़ा रहे हैं. उनका कहना है कि धनी देशों को इस दिशा में पहले क़दम उठाने चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें 'एशिया में प्रदूषण तीन गुना तक बढ़ेगा'14 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'चीन प्रदूषण रोकने में विफल रहा'28 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना उदासीनता के गर्त में डूबता सुंदरबन06 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'दो तिहाई आबादी को होगी पानी की किल्लत'15 फ़रवरी, 2007 | विज्ञान क्योटो संधि के लक्ष्यों से यूरोप पीछे27 दिसंबर, 2005 | विज्ञान ब्रिटेन में जलवायु परिवर्तन पर चर्चा01 फ़रवरी, 2005 | पहला पन्ना अमरीका नहीं मानेगा क्योटो संधि को08 दिसंबर, 2004 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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