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ब्रिटेन में जलवायु परिवर्तन पर चर्चा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूरी दुनिया से लगभग 200 वैज्ञानिक ब्रिटेन में जलवायु परिवर्तन पर एक सम्मेलन में भाग ले रहे हैं. इस सम्मेलन में भाग लेने वाले वैज्ञानिक ये तय करने की कोशिश करेंगे की जलवायु और पर्यावरण से संबंधित किन मापदंडों के आधार पर स्थिति को ख़तरनाक ठहराया जा सकता है. उन्हें ये उम्मीद है कि इससे 'ग्लोबल वार्मिंग' यानि पृथ्वी के तापमान के बढ़ने के मुद्दे पर उचित कदम उठाए जा सकेंगे. इस सम्मेलन को ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर का समर्थन हासिल है. पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस सम्मेलन का राजनीतिक पहलू ये है कि प्रधानमंत्री ब्लेयर पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ब्रिटेन जब जी-8 की अध्यक्षता करता है तो जलवायु परिवर्तन उनके एजेंडे पर प्रमुख मुद्दा होगा. पर्यावरण के पक्षधर संगठन 'फ़्रैंड्स ऑफ़ अर्थ' का कहना है कि सरकार को ब्रिटेन में औद्योगिकरण के फलस्वरूप कार्बन डाएऑक्सैड की गेस पैदा होने पर कड़े कदम उठाने होंगे. इस सम्मेलन के दौरान जलवायु परिवर्तन के विभिन्न क्षेत्रों और पूरी दुनिया के लिए असर और ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा घटाने पर चर्चा होगी. लेकिन इस मुद्दे पर कई वैज्ञानिकों और सरकारों के भिन्न विचार हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि इस सम्मेलन से स्थिति का विशलेषण करने में मदद मिलेगी. |
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