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'ग्लोबल वार्मिंग के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के दस प्रमुख मौसम वैज्ञानिकों ने कहा है कि ग्लोबल वार्मिंग यानी दुनिया के तापमान में हो रही बढ़ोत्तरी से निपटने के लिए फ़ौरन कार्रवाई करने की ज़रुरत बताई है. उन्होंने इस विषय की उपेक्षा के लिए बुश प्रशासन की निंदा की है. इन वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में तापमान में वृद्धि से समुद्र में पानी का स्तर जिस तरह बढ़ेगा उसे धनी देश भी नहीं रोक पाएँगे. वॉशिंगटन में इस विषय पर एक दिन की बैठक हुई है. दरअसल तीन साल पहले क्योटो समझौते से अलग होने के अमरीका के निर्णय के बाद से वैज्ञानिकों और बुश प्रशासन के बीच एक खींचतान चल रही है. इस बैठक से स्पष्ट हो गया है कि अब वैज्ञानिक इस मसले पर अपनी आवाज़ बुलंद करना चाहते हैं. इन वैज्ञानिकों ने अपने शोध से बता रहे हैं कि वैज्ञानिक रुप से क्या होने की संभावना है और इससे निपटने के लिए विकल्प क्या-क्या हैं. प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के माइकल ओपनहाइमर कहते हैं, "विज्ञान तो इस बात की चेतावनी बहुत समय से दे रहा है, अब ज़रुरत है कि राजनीतिज्ञ बैठें और सोचें कि वे क्या करेंगे, जैसा कि दुनिया के दूसरे हिस्से के राजनीतिज्ञ कर रहे हैं." प्रोफ़ेसर ओपनहाइमर का इशारा यूरोपीय संघ की ओर था जो अपने देशों में क्योटो समझौते से तहत ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा में नियंत्रण की प्रतिबद्धता दिखा रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम में हो रहा परिवर्तन, कई रोगों का फैलाव और जंगली जीवों का स्थान बदलना इसके कुछ प्रमाण हैं. हालांकि वैज्ञानिक मानते हैं कि अभी यह तय नहीं है कि आख़िरकार क्या प्रभाव पड़ेगा क्योंकि अलग-अलग मॉडल अलग-अलग नतीजे दिखा रहे हैं. एक मॉडल के अनुसार तो अगली शताब्दी तक समुद्र में पानी का स्तर एक मीटर तक बढ़ जाएगा. |
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