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मंगलवार, 02 दिसंबर, 2003 को 18:09 GMT तक के समाचार
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रूस क्योटो समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा
प्रदूषण से 'ग्रीनहाउस गैसें' बढ़ती हैं
रूस दुनिया का तीसरा सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाला देश है

रूस क्योटो समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा. इसका मतलब ये है कि अब ये समझौता अमल में नहीं आ सकेगी.

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आर्थिक सलाहकार एंड्री इलारियोनोव ने ये घोषणा की है.

क्योटो प्रोटोकॉल पर्यावरण संबंधी समझौता है जिसका उद्देश्य लगातार बढ़ती 'ग्रीनहाउस गैसों' को कम करने की कोशिश करना है.

इन गैसों से पृथ्वी पर प्रदूषण बढ़ता है जिससे 'ग्लोबल वॉर्मिंग' होती है यानि पृथ्वी का तापमान बढ़ता जाता है.

रूस का कहना है कि दुनिया को 'ग्लोबल वॉर्मिंग' यानि पृथ्वी के तापमान को बढ़ने से बचाने के लिए क्योटो प्रोटोकॉल का मौजूदा स्वरूप उसे मंज़ूर नहीं है.

रूस के अनुसार ये समझौता उसके आर्थिक विकास के रास्ते में रोड़े अटका सकता है.

इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से अमरीका ने पहले ही मना कर दिया था.

उसके बाद सबकी निगाहें रूस पर ही टिकी थीं.

विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने से उसकी आर्थिक स्थिति पर कोई ग़लत प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है.

रूस में वैसे भी प्रदूषण का स्तर इस प्रोटोकॉल में निश्चित किए गए स्तर से काफ़ी कम है और रूस को इससे आर्थिक लाभ भी हो सकता था यदि वह इस सुविधा का सौदा किसी अन्य देश से करता.

लेकिन रूसी नेतृत्व का मानना है कि रूस में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है और क्योटो प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने से कोई फ़ायदा नहीं है.

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