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बढ़ते पारे के लिए मानव ज़िम्मेदार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन और तापमान वृद्धि पर नज़र रखने वाले अंतरराष्ट्रीय पैनल आईपीसीसी का कहना है कि जलवायु में जो भी परिवर्तन हो रहा है उसके पीछे ज़्यादा हाथ मानवीय गतिविधियों से उत्पन्न होने वाले हालात का ही है रिपोर्ट में यहाँ तक कहा गया है कि संभावना ये है कि जलवायु परिवर्तन के लिए 90 प्रतिशत कारण मानवीय गतिविधियाँ ही हैं. इस पैनल ने शुक्रवार को अपनी यह रिपोर्ट पेरिस में जारी की जिसमें अनुमान व्यक्त किया गया है कि इस शताब्दी के अंत तक दुनिया का तापमान 1.8 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा. लेकिन इसी मौक़े पर एक अन्य अध्ययन रिपोर्ट जारी की गई जिसमें कहा गया है कि आईपीसीसी अपने तीसरी आकलन रिपोर्ट में काफ़ी परंपरागत रहा है. लेकिन आईपीसीसी के चेयरमैन डॉक्टर राजेंद्र पचौरी का कहना था, "यह बहुत उत्साहजनक बात है कि अब से पहले की रिपोर्टों में जो कुछ कहा गया है, ताज़ा रिपोर्ट में उससे कहीं बेहतर आकलन पेश किया जा सका है." पैनल की यह चौथी आकलन रिपोर्ट जारी करते समय डॉक्टर पचौरी ने वहाँ उपस्थित वैज्ञानिकों से कहा, "अगर आप इस पर नज़र डालें कि इंसान की कौन सी गतिविधियाँ जलवायु प्रणाली को प्रभावित कर रही हैं तो ग्रीन हाउस समूह की गैसों का उत्सर्जन एक बड़ा कारण नज़र आता है और यह भी कि इस उत्सर्जन को क़ाबू में करने में कोताही बरतने की क्या क़ीमत हो सकती है." पैनल का कहना है कि जलवायु परिवर्तन पर मानवीय गतिविधियों का प्रभाव स्पष्ट करने के लिए अब पहले के मुक़ाबले ज़्यादा सख़्त भाषा का इस्तेमाल किया जाएगा. इस रिपोर्ट को जलवायु परिवर्तन पर एक सटीक आकलन क़रार दिया जा रहा है. चिंता रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले पचास साल के दौरान मानवीय गतिविधियों की वजह से उत्पन्न होने वाली ग्रीन हाउस गैसों ने तापमान बढ़ाने में योगदान किया है और यह लगभग 90 प्रतिशत सही है.
इससे तथ्य से यह वैज्ञानिक सुनिश्चितता नज़र आती है कि मानव इस तरह का ईंधन जलाता है जिससे वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड बढ़ती है. रिपोर्ट में यह भी अनुमान पेश किया गया है कि अगले सौ साल के दौरान पृथ्वी का औसत तापमान लगभग जो 1.8 से 4 डिग्री सेल्सियस के बीच बढ़ जाएगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे सूखा बढ़ेगा, पानी की कमी होगी और दुनिया भर में लगभग पचास करोड़ लोग भूख का सामना करेंगे. कई सौ वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने बीते सप्ताह इस रिपोर्ट की जाँच-पड़ताल की और तापमान बढ़ने की वजह से समुद्रों में जलस्तर बढ़ने के मुद्दे पर भी ख़ासी बहस हुई. रिपोर्ट में निष्कर्ष पेश किया गया है कि वर्ष 2100 तक जलस्तर 28 से 43 सेंटीमीटर तक बढ़ जाएगा लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि इन आँकड़ों में हिम बहुल क्षेत्रों में बर्फ़ के पिघलने की स्थिति और परिणामों की विस्तृत जानकारी नहीं पेश की गई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मानवीय गतिविधियों की वजह से बढ़ रहे तापमान से ही समुद्री तूफ़ानों का ख़तरा भी बढ़ रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें मानवीय गतिविधियों से ही चढ़ा पारा01 फ़रवरी, 2007 | विज्ञान जलवायु मुद्दे पर अन्नान की चेतावनी15 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'जलवायु परिवर्तन पर रिपोर्ट आँखें खोलने वाली'30 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना जलवायु परिवर्तन से 'अफ़्रीका में संकट'29 अक्तूबर, 2006 | विज्ञान ग्लोबल वार्मिंग का ख़तरा पहले से ज़्यादा23 मई, 2006 | विज्ञान ग्लोबल वॉर्मिंग और भारत पर ख़तरा19 अप्रैल, 2006 | विज्ञान जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ अभियान09 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना उत्तरी गोलार्द्ध ज़्यादा गर्म हुआ है10 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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