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उत्तरी गोलार्द्ध ज़्यादा गर्म हुआ है | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन से हो रहे प्रभावों के बारे में नए शोध से पता चलता है कि बीसवीं शताब्दी में उत्तरी गोलार्द्ध पर पिछले क़रीब 1200 वर्षों में सबसे ज़्यादा गर्मी रही है और अब भी यह सबसे ज़्यादा गर्म है. विज्ञान पत्रिका - साइंस में ताज़ा शोध प्रकाशित हुआ है जिसमें कहा गया है कि उत्तरी गोलार्ध के क्षेत्रों में गर्मी की मौजूदा अवधि सबसे लंबी है और यह 9वीं शताब्दी के बाद से व्यापक तापमान बढ़ने की घटना भी है. शोध से इन दावों को बल मिलता है कि विश्व भर में ग्रीन हाउस समूह की गैसों के उत्सर्जन से जो जलवायु परिवर्तन हो रहा है उसकी वजह से तापमान बढ़ रहा है. यह शोध करने वाले ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने तापमान से संबंधित विभिन्न चीज़ों के नमूने लिए और पिछले क़रीब 750 वर्षों की विभिन्न लोगों की डायरियाँ भी देखीं. यूनिवर्सिटी ऑफ़ ईस्ट एंजिला के तिमोती ओसबोर्न और कीथ ब्रिफ़्फ़ा ने 1856 के बाद से तापमान को मापने वाले उपकरणों का विश्लेषण किया. फिर उन्होंने इस रिकॉर्ड की तुलना 800 ईसा पूर्व तक पीछे जाने वाले रिकॉर्ड से की. वैज्ञानिकों के शोध यह नज़र आता है कि मौजूदा गर्मी का दौर 9वीं शताब्दी के बाद से तापमान में सबसे ज़्यादा अनियमितता का दौर है. वैज्ञानिकों ने उत्तरी गोलार्द्ध के विभिन्न स्थानों से तापमान के 14 नमूनों का विश्लेषण किया. इस अध्ययन में लंबी उम्र वाले पेड़ों का भी विश्लेषण किया गया. पेड़ों की छाल से आसपास के तापमान का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. डायरी शोधकर्ताओं ने नीदरलैंड और बेल्जियम में पिछले क़रीब 750 वर्षों के दौरान लिखी गईं विभिन्न लोगों की डायरियों का भी अध्ययन किया जिनमें यह भी पता चला कि किन वर्षों में नहरें सर्दी से जम गई थीं.
शोधकर्ताओं के अनुसार, "यह रिकॉर्ड कई शताब्दियों यहाँ तक कि हज़ारों वर्षों तक जाता है. हमने सिर्फ़ यह गणना की कि किसी एक साल में तापमान औसत से कितना ज़्यादा था." एंजिला रस्किन यूनिवर्सिटी, कैंब्रिज में पर्यावरण विज्ञान शोध विभाग के निदेशक प्रोफ़ेसर जॉन वाटरहाउस का कहना है, "हालाँकि हम मौजूदा दौर के तापमान के सही-सही आँकड़े हासिल कर रहे हैं लेकिन हमें अतीत के तापमान के इतने सही आँकड़े अभी तक नहीं मिले थे जिनसे मौजूदा दौर के तापमान की तुलना की जा सके." साइंस ने नवंबर 2005 में एक लेख प्रकाशित किया था जिसमें कहा गया था कि इस समय ग्रीन हाउस समूह की कॉर्बन डाई ऑक्साइड और मीथेन गैसों का जो स्तर वह पिछले क़रीब साढ़े छह लाख साल में सबसे ज़्यादा है. | इससे जुड़ी ख़बरें जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ अभियान09 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना 'गैस उत्सर्जन के गंभीर परिणाम'30 जनवरी, 2006 | विज्ञान तेज़ी से बढ़ रहा है समुद्री जल स्तर27 जनवरी, 2006 | विज्ञान जानलेवा हो सकता है एसबेस्टस18 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'भारत-चीन के विकास से ख़तरा'12 जनवरी, 2006 | कारोबार 'पर्यावरण की रक्षा में निजी क्षेत्र प्रभावी'11 जनवरी, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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