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मानवीय गतिविधियों से ही चढ़ा पारा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अब इसमें कोई शक नज़र नहीं आता कि दुनिया में तापमान बढ़ने यानी ग्लोबल वार्मिंग की वजह मानवीय गतिविधियाँ ही हैं. ये कहना है संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक का जिन्होंने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर एक अंतरराष्ट्रीय पैनल यानी आईपीसीसी की रिपोर्ट जारी होने के मौक़े पर यह बात कही है. इस पैनल की यह ताज़ा रिपोर्ट शुक्रवार को जारी की जाएगी. पर्यावरण मामलों के बीबीसी संवाददाता मैट मैकग्रेथ का कहना है कि इस रिपोर्ट में पर्यावरण वैज्ञानिक यह कहने जा रहे हैं कि मानवीय गतिविधियों से उत्पन्न होने वाली कॉर्बन डाई ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन होना ही ग्लोबल वार्मिंग की सबसे बड़ी वजह है. इस रिपोर्ट से लीक हुए कुछ हिस्से देखने से पता चलता है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण अब बिल्कुल साफ़ नज़र आ रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले पचास साल के दौरान मानवीय गतिविधियों की वजह से उत्पन्न होने वाली ग्रीन हाउस गैसों ने तापमान बढ़ाने में योगदान किया है और यह लगभग 90 प्रतिशत सही है. इससे तथ्य से यह वैज्ञानिक सुनिश्चितता नज़र आती है कि मानव इस तरह का ईंधन जलाता है जिससे वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड बढ़ती है. रिपोर्ट में यह भी अनुमान पेश करने की संभावना है कि अगले सौ साल के दौरान पृथ्वी का औसत तापमान लगभग तीन डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे सूखा बढ़ेगा, पानी की कमी होगी और दुनिया भर में लगभग पचास करोड़ लोग भूख का सामना करेंगे. कई सौ वैज्ञानिक और अधिकारी इस सप्ताह इस रिपोर्ट की जाँच-पड़ताल कर रहे हैं और तापमान बढ़ने की वजह से समुद्रों में जलस्तर बढ़ने के मुद्दे पर भी ख़ासी बहस हुई है. संभावना है कि रिपोर्ट में यह निष्कर्ष पेश किया जाएगा वर्ष 2100 तक जलस्तर 28 से 43 सेंटीमीटर तक बढ़ जाएगा लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि इन आँकड़ों में हिम बहुल क्षेत्रों में बर्फ़ के पिघलने की स्थिति और परिणामों की विस्तृत जानकारी नहीं पेश की गई है. रिपोर्ट में यह भी कहे जाने की संभावना है कि मानवीय गतिविधियों की वजह से बढ़ रहे तापमान से ही समुद्री तूफ़ानों का ख़तरा भी बढ़ रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें जलवायु मुद्दे पर अन्नान की चेतावनी15 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'जलवायु परिवर्तन पर रिपोर्ट आँखें खोलने वाली'30 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना जलवायु परिवर्तन से 'अफ़्रीका में संकट'29 अक्तूबर, 2006 | विज्ञान ग्लोबल वार्मिंग का ख़तरा पहले से ज़्यादा23 मई, 2006 | विज्ञान ग्लोबल वॉर्मिंग और भारत पर ख़तरा19 अप्रैल, 2006 | विज्ञान जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ अभियान09 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना उत्तरी गोलार्द्ध ज़्यादा गर्म हुआ है10 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान क्योटो संधि के लक्ष्यों से यूरोप पीछे27 दिसंबर, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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