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मंगलवार, 23 मई, 2006 को 12:10 GMT तक के समाचार
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ग्लोबल वार्मिंग का ख़तरा पहले से ज़्यादा
मानवीय गतिविधियों ने बढ़ाई वायुमंडल में कार्बनडाइऑक्साइड की मात्रा
दो नए वैज्ञानिक अध्ययनों में पता चला है कि भविष्य में धरती के तापमान में अब तक के अनुमानों से कहीं ज़्यादा वृद्धि होगी.

ताज़ा अध्ययन में बीते काल के आँकड़ों के आधार पर भविष्य में तापमान में होने वाले परिवर्तन की भविष्यवाणी की गई है.

इसमें कहा गया है कि अभी तक तापमान बढ़ने के बारे में जो अनुमान लगाए गए हैं वो वास्तविकता से 75 प्रतिशत तक कम हो सकते हैं.

ताज़ा अध्ययनों में कहा गया है कि यदि मानव गतिविधियों के कारण वातावरण में कार्बनडाइऑक्साइड गैस का उत्सर्जन दुगुना होता है तो औसत तापमान में 1.5 से 4.5 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोत्तरी होगी.

अब तक धरती के उष्मीकरण के बारे में भविष्यवाणी मुख्यत: दो आधार पर की जाती रही है- पहला यह कि कार्बनडाइऑक्साइड की बढ़ी मात्रा का वातावरण को गर्म करने वाला असर क्या होगा, और दूसरा यह कि सूर्य कि किरणों के धरती की सतह से परावर्तन जैसी प्रक्रियाओं का क्या असर होगा.

नए अध्ययनों में एक तीसरे आधार पर भी गणना की गई है.

एक और आधार

इनमें इस बात पर भी विचार किया गया है कि मिट्टी से वायुमंडल में आने वाली कार्बनडाइऑक्साइड की मात्रा पर तापमान में बढ़ोत्तरी का क्या असर पड़ता है.

वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती को नियमित रूप से सामान्य से ज़्यादा गर्म और ज़्यादा ठंडे जलवायु के चक्र का सामना करना पड़ता है. और औसत से गर्म जलवायु वाले काल में वायुमंडल में जहाँ कार्बनडाइक्साइड की मात्रा बढ़ती है, वहीं पारिस्थितिकी में अन्य जगह यानि जंगलों, मिट्टी और पानी में कार्बनडाइक्साइड की मात्रा में कमी देखने को मिलती है.

अमरीका और यूरोप में हुए नए अध्ययनों की रिपोर्ट ज्योफ़िज़िकल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित की जाएगी.

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