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हिमालय के लिए हिलेरी की अपील | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिमालय की सबसे ऊँची चोटी एवरेस्ट पर विजय हासिल करने वाले एडमंड हिलेरी ने दुनिया भर की सरकारों से अपील की है कि वे जलवायु परिवर्तन से हिमालय को बचाने के प्रयास करें. न्यूज़ीलैंड निवासी एडमंड हिलेरी चाहते हैं कि विश्व धरोहर समिति सागरमाथा नेशनल पार्क को अपनी ख़तरे वाली सूची में शामिल करें. विश्व धरोहर समिति दुनिया भर की उन विशेष स्थानों और स्मारकों की सुरक्षा करता है जिनके अस्तित्व पर ख़तरा मंडरा रहा है. इस समिति की बैठक इस हफ़्ते होने वाली है. पर्यावरण की रक्षा के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं ने एडमंड हिलेरी के माध्यम से सागमाथा नेशनल पार्क के लिए अपना अनुरोध भेजा है. यदि सागरमाथा नेशनल पार्क इस सूची में शामिल कर लिया जाता है तो सरकारों को इसकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी उठानी होगी. बाढ़ का ख़तरा सर एडमंड हिलेरी ने शेरपा तेनज़िंग नोर्गे के साथ 1953 में एवरेस्ट पर विजय प्राप्त की थी. इसके बाद से ही वे हिमालय के लोगों की भलाई की परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं. 86 साल के होने जा रहे एडमंड हिलेरी ने अब अपना ध्यान जलवायु परिवर्तन की ओर लगाया है. बीबीसी को भेजे गए अपने बयान में एडमंड हिलेरी ने कहा है कि पिछले 50 सालों में हिमालय में तापमान तेज़ी से बढ़ा है. उन्होने कहा है, "तापमान में बढ़ोत्तरी की वजह से गंभीर बाढ़ आई हैं, पर्यावरण को बहुत नुक़सान पहुँचा है और स्थानीय लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है." उल्लेखनीय है कि 1985 में दिग शो नाम की बर्फ़ीली झील में पानी बढ़ने की वजह से यह फूट गया था और 14 पुलों सहित कई गाँव इसमें बह गए थे. तीन साल पहले संयुक्त राष्ट्र की एक संस्था और पर्वतीय विकास की अंतरराष्ट्रीय संस्था की ओर से किए गए अध्ययन में कहा गया था कि 40 बर्फ़ीली झीलों में पानी इस तरह बढ़ रहा है कि ये कभी भी फूट सकते हैं. इस अध्ययन में कहा गया था कि हज़ारों लोगों की जान को ख़तरा हो सकता है. |
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