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हिमालय को बचाने की गुहार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिमालय पर सबसे कम उम्र में और सबसे कम समय में चढ़ने वाले दो लोग साथ हों तो क्या होगा. जी नहीं वो हिमालय पर नयी चढ़ाई की योजना नहीं बना रहे हैं बल्कि हिमालय को बचाने की गुहार लगा रहे हैं. तेंबा त्श्री शेरपा ने सिर्फ 16 साल में हिमालय पर चढाई की थी जबकि पेंबा दोरजी शेरपा ने सिर्फ आठ घंटा दस मिनट में हिमालय की सर्वोच्च चोटी छू ली थी. अब इन दोनों लोगों को साथ लेकर फ्रेंडस औफ अर्थ नामक संस्था हिमालय के अस्तित्व को बचाने की कोशिश में लगी है. इस संस्था ने पेरिस में यूनेस्को के कार्यालय में अपील दायर की है कि सगरमाथा नेशनल पार्क रेंज को विश्व की खतरे में पड़ी विरासतों की सूची में डाला जाए. ये दोनों शेरपा लंदन में बीबीसी कार्यालय आए तो नेपाल के एक वकील प्रकाश शर्मा भी उनके साथ थे जिन्होंने इस अपील के बारे में कुछ और जानकारी दी. शर्मा ने कहा," तापमान बढ़ रहा है और बर्फ़ ख़त्म हो रही है. कहा जा रहा है कि हिमतालों के टूटने का भी ख़तरा है. इसीलिए हम यूनेस्को से अपील कर रहे है कि इसको बचाने के लिए कुछ करे. " यूनेस्को विश्व विरासत सम्मेलन के अनुसार इस सूची में शामिल सभी विरासतों की विशेष सुरक्षा की जानी ज़रुरी है. इस बार अपील सिर्फ सगरमाथा के लिए नहीं हो रही है बल्कि बेलिज के बैरियर रीफ़ और पेरु के हुआस्कारन नेशनल पार्क को भी खतरे में पड़ी सूची में शामिल करने की अपील की जा रही है. ये तीनों ही स्थान विश्व विरासत सूची में शामिल हैं लेकिन कोशिश है कि ये खतरे में पड़ी सूची में शामिल हो जाएं.
इन अपीलों से संभवत उन देशों पर एक नैतिक दबाव बढ़ने की उम्मीद है जो ग्रीनहाउस गैसों का सबसे अधिक उत्सर्जन करते हैं. ख़ास कर अमरीका, रुस और कनाडा. फ्रेंड्स ऑफ अर्थ का कहना है कि अपील दायर करना सांकेतिक विरोध है क्योंकि यूनेस्को किसी भी देश को ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता. संगठन कोशिश कर रहे है कि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन रोकने के लिए क़ानूनी उपाय करना आवश्यक है और वो इसी कोशिश में लगे हुए है. औद्योगिक देशों द्वारा उत्सर्जित ग्रीन हाउस गैसों से बढ़ी गरमी से हिमालय का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है और इससे हिमालय की गोद में रहने वाले लोग शायद सबसे अधिक परेशान हैं. शायद यही परेशानी इन दो विश्व रिकॉर्डधारियों पेंबा और तेंबा को पेरिस तक खींच ले गई है. |
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