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बुधवार, 06 जून, 2007 को 23:04 GMT तक के समाचार
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असहमतियों के बीच सम्मेलन शुरु
पुतिन
रूस की नाराज़गी देखते हुए बुश को सफ़ाई देनी पड़ी है कि रूस दुश्मन नहीं है
जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपायों पर असहमतियों और रूस के पश्चिमी देशों से बढ़ती दूरियों के बीच जर्मनी में जी-8 सम्मेलन शुरु हो गया है.

हालत यह है कि जब जी-8 के सारे नेता अभी जर्मनी पहुँचे भी नहीं थे तभी अमरीका ने कह दिया कि वह जलवायु परिवर्तन के लिए ज़िम्मेदार ग्रीन हाउस गैसों में कटौती के लिए सम्मेलन के किसी भी साझा प्रस्ताव पर सहमत नहीं होगा.

उधर रूस ने चेतावनी दी है कि यदि अमरीका मिसाइल रोधी कार्यक्रम को आगे बढ़ाता है तो वह यूरोपीय देशों में हथियारों को निशाना बनाएगा.

इस बीच सम्मेलन स्थल के बाहर हज़ारों प्रदर्शनकारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई हैं और पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए पानी की तेज़ बौछारें फेंकी हैं.

बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता जेम्स रॉबिन्स का कहना है कि दुनिया के सबसे ताक़तवर देशों के नेताओं की बैठक कभी आसान नहीं होती लेकिन यह बैठक तो कठिन ही दिखाई देती है.

अब जर्मनी की चांसलर और मेज़बान एंगेला मार्केल को तय करना है कि वे विवाद के मामलों को किस तरह उठाती हैं और सहमति बनाने का प्रयास करती हैं.

वैसे इस सम्मेलन के लिए जलवायु परिवर्तन के अलावा ग़रीबी और भूमंडलीकरण भी मुद्दा है.

अमरीकी रुख़

एंगेला मार्केल चाहती हैं कि इस सम्मेलन में यह सहमति बन जाए कि 2050 तक ग्रीनहाउस गैसों को आधा कर लिया जाएगा.

बुश और मार्केल
बुश सहमति की बात करते हैं लेकिन किसी प्रस्ताव के लिए तैयार नहीं हैं

लेकिन सम्मेलन शुरु होने से पहले ही अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने कहा है कि वह ग्रीनहाउस गैसों में कटौती के किसी भी बाध्यकारी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगा.

हालांकि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि वह ऐसे प्रस्ताव को स्वीकार कर सकते हैं जिसमें हर देश के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित करने की बात हो.

ऐसा लगता है कि अपने इस रुख़ से अमरीकी राष्ट्रपति बुश और उनके सलाहकारों ने जर्मनी की इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है कि सम्मेलन में ग्रीन हाउस गैसों को लेकर कोई सहमति बन सकती है.

हालांकि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि वे साथ बैठकर बात करने के लिए ही आए हैं.

जर्मनी की चाँसलर एंगेला मर्केल के साथ दोपहर के भोजन के दौरान जॉर्ज बुश ने कहा, "मैं यहाँ इस इच्छा के साथ आया हूँ कि क्योटो के बाद की संधि पर आपके साथ मिलकर काम किया जा सके."

उन्होंने कहा, "हमें देखना होगा कि हम ग्रीनहाउस गैसों में किस तरह से कटौती कर सकते हैं और ऊर्जा के क्षेत्र में हम किस तरह आत्मनिर्भर हो सकते हैं."

लेकिन यह वो लक्ष्य नहीं है जिसकी उम्मीद अमरीका से की जा रही है. अमरीका से वादे की उम्मीद की जा रही है कि इस सदी के मध्य तक वह ग्रीनहाउस गैसों में 50 प्रतिशत तक की कटौती कर लेगा.

ब्रिटेन, जर्मनी और ज़्यादातर यूरोप का मानना है कि यह एक अहम बिंदू है.

चांसलर एंगेला मर्केल ने हालांकि अपनी बात इस तरह से रखी जिससे यह न झलकता हो कि राष्ट्रपति बुश से उनके मतभेद हैं.

उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन में कोई सहमति ज़रूर बनेगी.

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