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गैस सोखने की क्षमता ख़तरे में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अंटार्कटिक के चारों ओर फैले दक्षिणी महासागर में कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता ख़तरे में है. पत्रिका 'साइंस' में छपे एक शोध में ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे, यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंगलिया और मैक प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर बायोजियोकेमिस्ट्री के वैज्ञानिकों का कहना है कि दक्षिणी महासागर कार्बन डाइऑक्साइड से पूरी तरह भर गया है. असल में यह महासागर भारी मात्रा में दुनिया भर में उत्सर्जित होने वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैस को सोखता है लेकिन अब इसमें इतनी कार्बन डाइऑक्साइड आ गई है कि सागर इसे सोखने की बजाय वापस वातावरण में छोड़ रहा है. वैज्ञानिकों के अनुसार अगर इसे रोका नहीं गया तो दुनिया का तापमान आशंकाओं से कहीं अधिक तेज़ी से बढ़ेगा. दक्षिणी महासागर दुनिया का पंद्रह प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड सोखती है जिससे तापमान सामान्य रखने में मदद मिलती है. यह गैस सागर के तल में बैठ जाती है. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते हुए तापमान और ओज़ोन परत को हुई क्षति के कारण तेज़ हवाएं चलने लगी हैं जिससे सागर का पानी हिलोरें लेता है और गैस नीचे बैठ नहीं पाती है. इतना ही नहीं गर्म और तेज़ हवाओं के कारण नीचे बैठी हुई गैस ऊपर आ रही है और वातावरण में फैल रही है. इन वैज्ञानिकों ने चार साल के गहन शोध के बाद यह चेतावनी दी है और कहा है कि आने वाले समय में अन्य महासागरों के साथ भी ऐसा हो सकता है. |
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