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सूर्य के अध्ययन के लिए उपग्रह रवाना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने दो उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं जो वैज्ञानिकों को सूर्य की त्रिआयामी तस्वीरें उपलब्ध कराएँगे. स्टीरियो अभियान सूर्य से उत्पन्न होनेवाली सौर ऊर्जा के बारे में अध्ययन करेगा. भीषण विस्फोट के बाद सूर्य की सतह पर पैदा होने वाली सौर-ज्वालाओं के साथ बड़ी मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है. साथ ही इसके कारण चुबंकीय तूफ़ान पैदा होते हैं जिससे धरती पर संचार प्रणाली के तहस-नहस होने की आशंका हमेशा बनी रहती है. ये यान सूर्य के चुंबकीय क्षेत्रों के अध्ययन के ज़रिए सौर-ज्वालाओं की पहेली को सुलझाने की कोशिश करेंगे. नासा के वैज्ञानिक अमिताभ घोष ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि हमें उम्मीद है कि इससे शक्तिशाली सौर-ज्वालाओं की उत्पत्ति के बारे में सही अनुमान लगाए जा सकेंगे. ऐसा संभव हुआ तो धरती पर संचार प्रणाली को सुरक्षित रखा जा सकेगा. इस अभियान में भेजे गए दो उपग्रहों को डेल्टा-2 अमरीका के फ्लोरिडा स्थित केप कैनेवरल प्रक्षेपण केंद्र से प्रक्षेपित किया गया. ये दोनों उपग्रह एक से हैं और ये सूर्य का चक्कर लगाएँगे. इनमें से एक सूर्य के थोड़े ज़्यादा क़रीब जाएगा ताकि त्रिआयामी तस्वीर उपलब्ध कराई जा सके. सौर-ज्वालाओं में वैज्ञानिकों की दिलचस्पी एक और कारण से भी है. दरअसल इन शक्तिशाली ज्वालाओं के साथ अंतरिक्ष में नुक़सानदेह विकिरण भी फैलते हैं. माना जाता है कि अनियमित तौर पर उठने वाली इन ब्रह्मांडीय ज्वालाओं की उत्पत्ति में सूर्य की चुंबकीय ताक़त का मुख्य योगदान होता है. | इससे जुड़ी ख़बरें सूर्य और पृथ्वी के बीच फ़ासला?07 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना सौर बादल धरती से टकराया29 अक्तूबर, 2003 | विज्ञान सूर्य से निकलीं सबसे बड़ी सौर लपटें05 नवंबर, 2003 | विज्ञान 'कैंसर से बचाती है सूर्य की रोशनी'21 नवंबर, 2003 | विज्ञान सूरज के सामने से शुक्र की यात्रा ख़त्म06 जून, 2004 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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