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सूरज के सामने से शुक्र की यात्रा ख़त्म | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
122 साल बाद सूरज और पृथ्वी के बीच से शुक्र ग्रह की यात्रा ख़त्म हो गई है. दुनियाभर में लोगों ने इस असाधारण नज़ारे का आनंद उठाया. छह घंटे तक इस नज़ारे को यूरोप, एशिया और अफ्रीका में देखा गया. ज़मीन से देखने पर शुक्र काले धब्बे की तरह नज़र आया. यह नज़ारा ग्रीनिच मानक समय के मुताबिक़ सुबह पाँच बजकर बीस मिनट पर शुरू हुआ और क़रीब छह घंटे तक चला. वैज्ञानिकों ने लोगों को पहले की चेतावनी दे थी कि इस नज़ारे को नंगी आँखों से नहीं देखना चाहिए क्योंकि इस मौक़े पर सूरज की तरफ़ सामान्य आँखों से देखने पर अंधे होने का ख़तरा था. वैज्ञानिकों ने इस घटना का इस्तेमाल नई प्रोद्योगिकी के परीक्षण के लिए किया और ऐसे ग्रहों का पता लगाने की कोशिश की जो शुक्र के बराबर आकार के हैं और कई प्रकाश वर्ष दूर हैं. असाधारण घटना आठ जून को सूरज के सामने से शुक्र का गुज़रना बिल्कुल एक असाधारण मौक़ा था. क्योंकि 1882 के बाद ऐसा पहली बार हुआ.
दूरबीन बनाए जाने के बाद से सिर्फ़ छह बार ऐसा हुआ था जब शुक्र ग्रह सूरज के सामने से होकर गुज़रा हो. ये मौक़े थे - 1631, 1639, 1761, 1874 और 1882. इस तरह इस साल यह नज़ारा 122 साल बाद देखने को मिला और अगला 2012 में संभावित है. इस घटना का अपना ख़ास महत्व है. 17वीं और 18वीं शताब्दी में अंतरिक्ष वैज्ञानिक सौर्य प्रणाली के कुछ बुनियादी तथ्यों पर काम करने के लिए इस घटना का इस्तेमाल किया करते थे. इसके सहयोग से वे पृथ्वी और सूरज के बीच की दूरी पता लगाने में कामयाब हुए थे जो क़रीब 14 करोड़ 96 लाख किलोमीटर है. 6 दिसंबर 1631 को ऐसी पहली घटना की भविष्यवाणी करने वाले वैज्ञानिक थे जोहन्नस केपलर लेकिन वह यह नज़ारा देखने से पहले ही गुज़र गए थे. |
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