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मंगलवार, 25 सितंबर, 2007 को 02:21 GMT तक के समाचार
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'मानव गतिविधियों से बढ़ रहा है तापमान'
जलवायु परिवर्तन
अब लोगों को जलवायु परिवर्तन के असर दिखाई देने लगे हैं
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के एक सर्वेक्षण में पता चला है कि दुनिया भर के ज़्यादातर लोग मानते हैं कि मानव गतिविधियों की वजह से ही तापमान बढ़ रहा है.

बड़ी संख्या में लोग मानते हैं कि तापमान वृद्धि यानी ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए तत्काल क़दम उठाए जाने की ज़रुरत है.

इस सर्वेक्षण के तहत 21 देशों में 22 हज़ार से ज़्यादा लोगों से इस बारे में बात की गई और ज़्यादातर लोग इस मुद्दे पर एकमत थे.

दस में से औसतन आठ लोग मानते हैं कि यातायात और उद्योगों जैसी मानव गतिविधियाँ ग्लोबल वार्मिंग का एक बड़ा कारण है.

इस तर्क से उन वैज्ञानिकों को तसल्ली होगी क्योंकि वे ख़ुद भी लंबे समय से ऐसी ही दलील दे रहे हैं.

10 में से नौ लोगों ने कहा कि कोई क़दम उठाना ज़रुरी है जबकि दो तिहाई लोगों का कहना था कि इससे निपटने के लिए 'ज़रुरी है कि तत्काल बड़े क़दम उठाए जाएँ'.

किसी भी देश में लोगों ने यह नहीं कहा कि ग्लोबल वार्मिंग को लेकर कोई क़दम उठाए जाने की ज़रुरत नहीं है.

73 प्रतिशत लोगों ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग पर एक समझौते की ज़रुरत है जिसके तहत विकासशील देश कार्बन उत्सर्जन कम करें.

और इसके बदले में धनी देश तेज़ी से विकसित होते लेकिन ग़रीब देशों को तकनीक और आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाए. इन देशों में भारत और चीन जैसे देश शामिल हैं.

लोगों का समर्थन

पिघलते ग्लेशियर
जलवायु परिवर्तन का असर अब लोगों को महसूस होने लगा है

यह सर्वेक्षण ग्लोबस्कैन नाम की एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने की है.

ग्लोबस्कैन के अध्यक्ष डॉउग मिलर ने कहा, "इस सर्वेक्षण के नतीजों से पता चलता है कि ज़्यादातर लोग अब ग्लोबल वार्मिंग का अपने ऊपर असर होता हुआ देख रहे हैं."

उनका कहना था, "इस सर्वेक्षण के नतीजों के बाद लगता है कि राजनेताओं को इस विषय पर माहौल बनाने के लिए लोगों का इससे अच्छा समर्थन कभी हासिल नहीं होगा."

चीन में जहाँ सरकार कार्बन उत्सर्जन में कटौती के प्रस्तावों का विरोध करती रही है, वहाँ 68 प्रतिशत लोगों ने कहा है क विकासशील देशों में, जिसमें उनका अपना देश भी शामिल है, कार्बन डायऑक्साइड की मात्रा घटाने की ज़रुरत है.

अमरीकी जनता की भी राय इससे कुछ अलग नहीं थी जहाँ सरकार को लगता है कि ग्रीन हाउस गैसों में ख़ुद पहल करके कटौती करने की ज़रुरत नहीं है.

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