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उत्सर्जन कम करने का मसौदा ख़ारिज | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने हानिकारक गैसों का उत्सर्जन रोकने के जी-8 के मसौदे को ख़ारिज कर दिया है. यह मसौदा जर्मनी ने तैयार किया था. मीडिया संगठनों को मिले दस्तावेज़ के मुताबिक अमरीका ने कड़ी टिप्पणी करते हुए ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित करने या समयसीमा बनाने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया.. दरअसल जर्मनी ने ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के लिए एक प्रारूप तैयार किया है जिसे विकसित औद्योगिक देशों के समूह जी-आठ की बैठक में अगले महीने पेश किया जाना है. जर्मनी चाहता है कि इस समूह के सभी सदस्य देश एक नियत समयसीमा और ग्रीनहाउस गैसों में बड़ी कटौती के लिए लक्ष्य निर्धारित करने के लिए तैयार हो जाएं. दस्तावेज़ में अमरीकी अधिकारियों की ओर से टिप्पणी की गई है कि इसमें अमरीका की चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया है. संवाददाताओं का कहना है कि दस्तावेज़ के सामने आने के बाद यह साफ है कि 6 से 8 जून के दौरान जी-आठ की बैठक में जलवायु परिवर्तन को लेकर काफ़ी गहमागहमी रहेगी. इससे पहले गुरुवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि जलवायु परिवर्तन के मसले पर बुश प्रशासन अपने रुख में बदलाव करने वाला है. जबकि दस्तावेज़ जारी करने वाले ग्रीनपीस का कहना है कि इससे ज़ाहिर है कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर अमरीका को रुख में बदलाव लाने के लिए समझाने में असफल रहे हैं. ग़ौरतलब है कि अमरीका ने क्योटो प्रोटोकॉल 2001 पर हस्ताक्षर नहीं किया है. इस संधि के तहत वर्ष 2012 तक उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए ज़रूरी प्रयासों के एक मसौदे पर मई के शुरुआती हफ़्ते में भी 120 देशों के विशेषज्ञों के बीच सहमति बनी है. वैज्ञानिक पहले ही यह चिंता व्यक्त कर चुके हैं कि अगर तुरंत कुछ नहीं किया गया तो दुनिया को बचाना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा. चिंता इस बात को लेकर भी है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो ऐसे परिवर्तन होने शुरू हो जाएँगे जिनको पलटा नहीं जा सकेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें 'इस बार सामान्य से कुछ कम बारिश'19 अप्रैल, 2007 | विज्ञान वनों से बढ़ता पृथ्वी का तापमान!10 अप्रैल, 2007 | विज्ञान जलवायु परिवर्तन का असर करोड़ों पर06 अप्रैल, 2007 | विज्ञान ब्रिटेन में कार्बन प्रदूषण में कमी की पहल13 मार्च, 2007 | पहला पन्ना 'युद्ध जितना ख़तरनाक है जलवायु परिवर्तन'02 मार्च, 2007 | पहला पन्ना बढ़ते पारे के लिए मानव ज़िम्मेदार02 फ़रवरी, 2007 | विज्ञान जलवायु परिवर्तन के 'गंभीर परिणाम' होंगे15 मई, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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