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सौरमंडल के जन्म की खोज का प्रयास | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सौर मंडल के जन्म के बारे में और अधिक जानकारी एकत्र करने के लिए अमरीकी वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में तेज़ गति से जा रहे एक पुच्छल तारे या कॉमेट को निशाना बनाकर एक गोला दागा है. अमरीकी अंतरिक्ष केंद्र नासा के वैज्ञानिकों ने तेल के एक ड्रम या वाशिंग मशीन के आकार का ये प्रोजेक्टाइल, डीप इंपैक्ट नाम के एक मानवरहित अंतरिक्ष यान से दागा. ये प्रोजेक्टाइल सोमवार को पुच्छल तारे से टकराएगा और उसपर ऐसे द्रव्य बिखेर देगा जिनकी समीक्षा से ये पता चल पाएगा कि सौर मंडल के जन्म के समय परिस्थितियाँ कैसी थीं. टेम्पल-1 नाम का ये पुच्छल तारा, और 372 किलोग्राम वज़न वाला प्रोजेक्टाइल, दोनों ही बंदूक की गोली से भी कई गुना अधिक गति से जा रहे हैं. टक्कर टेम्पल-1 से टकराने के समय प्रोजेक्टाइल की गति 37,000 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी. प्रोजेक्टाइल के टकराने से पुच्छल तारे में एक फ़ुटबॉल स्टेडियम के आकार का गड्ढा बन जाएगा जिसपर अंतरिक्ष में मौजूद उपकरणों और धरती पर स्थित टेलीस्कोपों से निगाह रखी जाएगी. डीप इंपैक्ट यान, 13 करोड़ 30 लाख किलोमीटर की दूरी से, टक्कर होने और उसके बाद के समय की तस्वीरें लेगा. पुच्छल तारे बर्फ़ और चट्टानों से बने ऐसे छिद्रदार पिंड होते हैं जो सौर मंडल की बाहरी परतों से निकलते हैं. कुछ पुच्छल तारे भीतर की ओर जाते हैं और सूर्य के इर्द-गिर्द चक्कर काटने लगते हैं. द्रव्य अन्य पुच्छल तारों की तरह टेम्पल-1 में भी ऐसे द्रव्य हैं जो सौर मंडल के जन्म के समय से अभी तक वैसे ही हैं. ये द्रव्य टेम्पल-1 की भीतरी तह में बैठे हैं. इस अभियान से जुड़ी वैज्ञानिक जेसिका सनशाइन ने कैलिफ़ोर्निया में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस द्रव्य ने पिछले चार अरब 60 करोड़ वर्षों से रोशनी नहीं देखी है. जेसिका ने बताया,"एक अच्छे भूवैज्ञानिक की तरह हम टेम्पल-1 को हथौड़े से मारकर ये देखना चाहते हैं कि इसके भीतर क्या है". प्रोजेक्टाइल टेंपल-1 से टकराने के बाद ही टूट-टूटकर बिखर जाएगा लेकिन एक कैमरा अंतिम क्षणों में तस्वीर खींचेगा. डीप इंपैक्ट के प्रोजेक्ट मैनेजर रिक ग्रेमियर इस अभियान को ऐसे बयान करते हैं,"ये एक तरह से ऐसा होगा कि एक गोली दूसरी गोली को लगेगी और तीसरी गोली उस समय सही जगह जमी होगी". वैसे जटिल लग रही प्रक्रिया के बावजूद अभियान से जुटे वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि कैमरा निशाने से नहीं चूकेगा. |
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