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टेस्टोस्टेरॉन बनाता है पुरुषों को चुलबुला | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पुरुषों का स्वभाव प्राकृतिक रूप से महिलाओं से ज़्यादा चुलबुला होता है और ताज़ा खोज बताती हैं कि इसका कारण पुरुषों में मौजूद टेस्टोस्टेरॉन हारमोन है. नॉरफ़ॉक एंड नॉरविक विश्वविद्यालय अस्पताल के प्रोफ़ेसर सैम शुस्टर का कहना है, “पुरुष महिलाओं की अपेक्षा ज़्यादा दिल्लगी करते हैं और उनके मज़ाक ज़्यादा उग्र भी हो सकते हैं.” शोध करने वाले डॉक्टर ने अपने प्रयोग के दौरान एक पहिए वाली अनोखी साइकिल चलाकर इस बात का अंदाज़ा लगाना चाहा कि उनकी मज़ाकिया रुचि के प्रति महिलाओं और पुरुषों की प्रतिक्रिया कैसी है. उन्होंने ब्रिटेन के मेडिकल पत्र को बताया, “महिलाएं इसको बढ़ावा देते और तारीफ़ करते हुए देखी गईं जबकि पुरुष इसका मज़ाक बनाते देखे गए. युवा पुरुषों को ज़्यादा आक्रामक पाया गया.” पहले के प्रयोगों से भी ऐसे संकेत मिलते हैं जिससे स्पष्ट होता है कि महिलाओं और पुरुषों के मज़ाक करने और मज़ाक पर महिलाओं और पुरुषों की प्रतिक्रिया में अंतर पाया जाता है. महिलाएं पुरुषों से कम मज़ाक करती हैं. पुरुष कॉमेडियनों की संख्या भी महिलाओं से ज़्यादा हैं. आक्रामक और मज़ाकिया शोध संकेत देते हैं कि पुरुष दूसरों को उपहास का पात्र बनाकर ज़्यादा आक्रामकता से मज़ाक करते हैं. प्रोफ़ेसर शुस्टर मानते हैं कि पुरुष हॉरमोन के प्रभाव से विकसित आक्रामकता से ही मज़ाक उत्पन्न होता है. उन्होंने टाइन की न्यूकासल स्ट्रीट पर करीब 400 लोगों से अपनी एकपहिया साइकिल पर चलने वाली मज़ेदार बात कर उनकी प्रतिक्रियाओं को कलमबद्ध किया. क़रीब आधे लोगों ने शब्दों में जवाब दिया– जिनमें ज़्यादातर पुरुष थे. महिलाओं में बहुत कम ने मज़ाकिया जवाब दिए. जबकि 75 फ़ीसदी पुरुषों ने दिल्लगी की- जैसे ज़्यादातर ने चीख कर कहा, “पहिया खो गया है क्या?” नीचा दिखाने की कोशिश कई बार पुरुषों की चुटकी नीचा दिखाने के लिए उपहासपूर्ण भी होती. कार में बैठे युवा पुरुष खासतौर पर आक्रामक होते. वे अपनी खिड़की खोलकर ऊंची आवाज़ में गालियां देते हुए निकल जाते. इस तरह का व्यवहार बूढ़े लोगों की ओर से कम ही होता था जबकि प्रशंसापूर्ण चुटकी लेने वालों में महिलाएं ज़्यादा थीं. प्रोफ़ेसर शुस्टर ने कहा, “एक पहिए वाली साइकिल का विचार मूलभूत रूप से मज़ाकिया था और इसे और परिणामों की ज़रूरत नहीं थी.” वे कहते हैं, “इसका सबसे आसान जवाब टेस्टोस्टेरॉन जैसे पुरुष हॉरमोन का प्रभाव है.” प्रोफ़ेसर शुस्टर का दावा है कि शुरूआती आक्रामकता धीरे-धीरे ज़्यादा गूढ़ और परिष्कृत चुटकुले में बदल जाती है. यानी मज़ाक आक्रामकता को छिपा लेता है. डॉक्टर निक नीव नॉर्थम्ब्रिया विश्वविद्यालय में मनोविज्ञानी हैं जो शरीर पर टेस्टोस्टेरॉन के व्यवहार और मनोवैज्ञानिक प्रभावों के बारे में अध्ययन कर रहे हैं. उनका मानना है कि पुरुष आक्रामक होकर प्रतिक्रिया कर सकते हैं क्योंकि उन्हें एक पहिए वाली साइकिल पर चलने वाला दूसरा पुरुष डर की तरह लगता है जो महिलाओं का ध्यान उनकी तरफ़ से हटाकर अपनी तरफ़ खींच सकता है. उनके अनुसार, “यह युवा पुरुषों के लिए चुनौती भरा है और यह मुझे आश्चर्यचकित करने वाला नहीं लगता कि उनकी प्रतिक्रिया ज़्यादा धमकी भरी होती है.” | इससे जुड़ी ख़बरें मकड़ी के ज़हर से सेक्स में बेहतरी!04 मई, 2007 | विज्ञान पैच बढ़ा सकता है सेक्स की चाहत27 मार्च, 2007 | विज्ञान अब आएगी मर्दों के लिए गोली30 अक्तूबर, 2006 | विज्ञान ईरानी मर्दों में बढ़ा प्लास्टिक सर्जरी का चलन02 अक्तूबर, 2006 | विज्ञान महिलाएँ सुरक्षित ड्राइवर क्यों?07 नवंबर, 2005 | विज्ञान जीन ही जीतता है लड़कियों का दिल भी17 जून, 2005 | विज्ञान मादा तिलचट्टे की गंध, नर की मौत!19 फ़रवरी, 2005 | विज्ञान महिलाओं की विज्ञान की समझ पर सवाल18 जनवरी, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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