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शनिवार, 11 मार्च, 2006 को 01:36 GMT तक के समाचार
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नासा यान मंगल ग्रह की कक्षा में पहुँचा
एमआरओ
मंगल ग्रह पर पानी है या नहीं और है तो कितना है, जीवन रहा है या नहीं, मंगल ग्रह के वातावरण में कौन सी गैसें हैं, ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब तलाश करने की उत्सुकता के तहत मंगल ग्रह अभियान चलाया गया है.

मंगल ग्रह के बारे में पता करने की कोशिश 90 के दशक से कई यानों को भेजकर की गई है लेकिन इनमें से कई सफल नहीं हो पाए हैं.

और शुक्रवार, 10 मार्च 2006 को यह ऐतिहासिक क्षण आया जब मार्स रीकॉनसेंस ऑर्बिटर नामक यह यान मंगल ग्रह की कक्षा में पहुँच गया.

अमरीकी अंतरिक्ष संस्था नासा के लिए ये एक बहुत ही महत्वपूर्ण चरण है क्योंकि लगभग आधे यान यहीं आकर जल जाते थे और इसकी सफलता या विफलता से जुड़ा था अरबों डॉलर का ये मार्स कार्यक्रम और उससे जुड़ी राजनीति भी.

इस यान को पृथ्वी से मंगल ग्रह की कक्षा तक पहुँचने के लिए 30 करोड़ मील की यात्रा करनी पड़ी थी.

इस सफलता के बाद अब ये यान मंगल के आसपास का एक चक्कर 35 घंटे में काट रहा है और अगले कुछ महीनों में ये मंगल ग्रह से अपनी दूरी कम करते हुए दो घंटे में एक चक्कर काटने लगेगा.

ये वो पूरी प्रक्रिया है जिसके लिए इस कार्यक्रम से जुड़े नासा के सैंकड़ों वैज्ञानिक पाँच साल से लगे हुए थे और जिसके लिए नासा ने करोड़ों डॉलर ख़र्च कर दिए हैं.

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