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नासा यान मंगल ग्रह की कक्षा में पहुँचा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मंगल ग्रह पर पानी है या नहीं और है तो कितना है, जीवन रहा है या नहीं, मंगल ग्रह के वातावरण में कौन सी गैसें हैं, ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब तलाश करने की उत्सुकता के तहत मंगल ग्रह अभियान चलाया गया है. मंगल ग्रह के बारे में पता करने की कोशिश 90 के दशक से कई यानों को भेजकर की गई है लेकिन इनमें से कई सफल नहीं हो पाए हैं. और शुक्रवार, 10 मार्च 2006 को यह ऐतिहासिक क्षण आया जब मार्स रीकॉनसेंस ऑर्बिटर नामक यह यान मंगल ग्रह की कक्षा में पहुँच गया. अमरीकी अंतरिक्ष संस्था नासा के लिए ये एक बहुत ही महत्वपूर्ण चरण है क्योंकि लगभग आधे यान यहीं आकर जल जाते थे और इसकी सफलता या विफलता से जुड़ा था अरबों डॉलर का ये मार्स कार्यक्रम और उससे जुड़ी राजनीति भी. इस यान को पृथ्वी से मंगल ग्रह की कक्षा तक पहुँचने के लिए 30 करोड़ मील की यात्रा करनी पड़ी थी. इस सफलता के बाद अब ये यान मंगल के आसपास का एक चक्कर 35 घंटे में काट रहा है और अगले कुछ महीनों में ये मंगल ग्रह से अपनी दूरी कम करते हुए दो घंटे में एक चक्कर काटने लगेगा. ये वो पूरी प्रक्रिया है जिसके लिए इस कार्यक्रम से जुड़े नासा के सैंकड़ों वैज्ञानिक पाँच साल से लगे हुए थे और जिसके लिए नासा ने करोड़ों डॉलर ख़र्च कर दिए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें नासा यान मंगल ग्रह की कक्षा में पहुँचा11 मार्च, 2006 | विज्ञान शटल कार्यक्रम बंद नहीं होगा07 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान प्लूटो के लिए पहली बार यान रवाना19 जनवरी, 2006 | विज्ञान यूरोप का शुक्र मिशन शुरू09 नवंबर, 2005 | विज्ञान मंगल ग्रह धरती के क़रीब आया29 अक्तूबर, 2005 | विज्ञान 'मंगल उम्मीद से कहीं अधिक सक्रिय ग्रह'21 सितंबर, 2005 | विज्ञान स्पिरिट ने मंगल की नई तस्वीरें भेजीं08 सितंबर, 2005 | विज्ञान नासा के नए मंगल अभियान की शुरुआत12 अगस्त, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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