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यूरोप का शुक्र मिशन शुरू | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पृथ्वी के सबसे निकट ग्रह शुक्र के लिए एक दशक में पहला यूरोपीय अंतरिक्ष मिशन बुधवार को शुरू हुआ जिसके तहत कज़ाख़्स्तान के बाइकानूर से वीनस एक्सप्रेस यान छोड़ा गया. यूरोप का वीनस एक्सप्रेस खोजी यान एक रूसी रॉकेट पर बुधवार तड़के ग्रीनिच मानक समय के अनुसार तीन बजकर 33 मिनट पर छोड़ा गया. यह रोबोट यान शुक्र ग्रह का के वातावरण का अध्ययन करने के लिए उसका चक्कर लगाएगा. वीनस एक्सप्रेस को रूसी रॉकेट सोयूज़ के ज़रिए छोड़ा गया जिस पर एक बूस्टर लगा था जो यान को शुक्र में छोड़ देगा. वीनस एक्सप्रेस को अपनी मंज़िल तक क़रीब पाँच महीने में पहुँच जाना चाहिए वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस मिशन से पृथ्वी पर भी जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया की कुछ और जानकारी मिल सकेगी. ब्रिटेन के ऑक्सफॉर्डशर में रथरफ़ॉर्ड एप्पलटन प्रयोगशाला में प्रोफ़ेसर मैनुएल ग्रांडे ने इसे बेहद उत्साहजनक मिशन बताया. उन्होंने कहा, "पृथ्वी शुक्र और मंगल के बीच में बराबर दूरी पर है और हम अगर पृथ्वी को मार्स एक्सप्रेस के साथ रखें तो इससे तीनों ग्रहों के विकास का पता चल सकेगा." पृथ्वी का 'जुड़वाँ' शुक्र ग्रह आकार में लगभग पृथ्वी के ही बराबर है और समझा जाता है कि उसकी संरचना भी पृथ्वी के ही समान है लेकिन यह समानता बस यहीं रुक जाती है.
शुक्र की सतह पर कॉर्बन डाइऑक्साइड की घनी परत है जो अंदर आने वाले सूर्य किरणों को अपने में सोख लेती है जिससे उसकी सतह का औसत तापमान 467 डिग्री सेल्सियस तक रहता है. सतह का दबाव पृथ्वी के मुक़ाबले क़रीब 90 गुना ज़्यादा है. यूरोपीय स्पेस एजेंसी (एसा) में विज्ञान निदेशक डेविड साउथवुड का कहना था, "मेरा मानना है कि शुक्र पृथ्वी का ही जुड़वाँ है लेकिन शुक्र उसका विकास बहुत ही ग़लत तरीके से हुआ है." "अगर सौर प्रणाली की शुरूआत पर ग़ौर करें तो शुक्र और पृथ्वी में बहुत समानता थी और यह पता लगाना मुश्किल था कि किस पर जीवन समर्थक परिस्थितियाँ हैं." | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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