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मंगल मिशन में बड़ी कामयाबी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अधिकारियों ने कहा है कि मंगल ग्रह अभियान के लिए जो यान भेजा गया था उसने इस ग्रह की कक्षा में ख़ुद को स्थापित कर लिया है जिसे एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है. अब यहाँ से यह यान मंगल ग्रह पर की सतह का परीक्षण कर सकेगा जिसमें अतीत में पानी या जीवन होने के चिन्हों का जाँच-पड़ताल भी शामिल है. बीबीसी के विज्ञान मामलों के संवाददाता पल्लब घोष का कहना है कि नासा के नियंत्रण केंद्र पर इस ख़बर के बाद बड़ी राहत और उत्साह का माहौल था. इस मिशन का सबसे ख़तरनाक हिस्सा अब पूरा हो गया है. क़रीब तीस करोड़ मील का सफ़र तय करने के बाद इस यान एमआरओ ने ख़ुद को मंगल ग्रह की कक्षा में स्थापित कर लिया है जहाँ से वह परिक्रमा कर सकेगा. अब मंगल ग्रह की सतह की जाँच-पड़ताल के लिए उसका काम काफ़ी आसान होगा. इससे पहले के मिशन इस स्तर पर आकर ही नाकाम हो चुके हैं. अगले छह महीनों के दौरान यह यान अपनी कक्षा का दायरा आहिस्ता-आहिस्ता कम करेगा ताकि मंगल ग्रह के ज़्यादा नज़दीक पहुँचकर वैज्ञानिक जाँच-पड़ताल कर सके. नवंबर 2006 तक यह यान मंगल ग्रह की सतह की साफ़ तस्वीरें भेजने में कामयाब हो सकेगा. इस मिशन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि मंगल ग्रह सदियों में किस तरह से बदला है और उस पर क्या कभी पानी या जीवन रहा है, क्या वहाँ कभी नदियाँ, समुद्र रहे हैं और वहाँ का मौसम वग़ैरा कैसा रहा है. यह यान भविष्य में भेजे जाने वाले मिशन यानों के लिए स्थापित करने के स्थानों का भी पता लगाएगा और प्रकृति के एक बड़े रहस्य से कुछ पर्दा उठा सकेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें शटल कार्यक्रम बंद नहीं होगा07 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान प्लूटो के लिए पहली बार यान रवाना19 जनवरी, 2006 | विज्ञान यूरोप का शुक्र मिशन शुरू09 नवंबर, 2005 | विज्ञान मंगल ग्रह धरती के क़रीब आया29 अक्तूबर, 2005 | विज्ञान 'मंगल उम्मीद से कहीं अधिक सक्रिय ग्रह'21 सितंबर, 2005 | विज्ञान फिर चाँद पर पड़ेंगे मानव क़दम19 सितंबर, 2005 | विज्ञान स्पिरिट ने मंगल की नई तस्वीरें भेजीं08 सितंबर, 2005 | विज्ञान नासा के नए मंगल अभियान की शुरुआत12 अगस्त, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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