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गुरुवार, 19 जनवरी, 2006 को 21:31 GMT तक के समाचार
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प्लूटो के लिए पहली बार यान रवाना
न्यू हराइज़न्स परियोजना
न्यू होराइज़न्स अब तक का सबसे तेज़ यान है
अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपनी 'न्यू होराइज़न्स' परियोजना के तहत पहली बार प्लूटो ग्रह के लिए यान सफ़लतापूर्वक रवाना किया है.

प्लूटो सौर-मण्डल का एक मात्र ऐसा ग्रह है जिसकी खोजबीन नहीं हुई है और वैज्ञानिकों को सौर मंडल के ग्रहों में से सबसे कम जानकारी इसी ग्रह के बारे में है.

इस यान को फ़्लोरिडा स्थित केप कैनेवरल अंतरिक्ष केंद्र से मंगलवार शाम रवाना करने की योजना थी लेकिन ख़राब मौसम के कारण इसे दो बार स्थगित करना पड़ा.

'किताबें दोबारा लिखी जाएँगी'

ये यान पिछले किसी भी यान के मुकाबले में सबसे अधिक तेज़ी से छोड़ा गया ये अपनी पाँच अरब किलोमीटर की यात्रा नौ साल में पूरी करेगा.

इस परियोजना का मकसद ग्रहों के अस्तित्व में आने के बारे में जानकारी हासिल करना होगा.

 प्लूटो के बारे में हमें जितनी जानकारी है उसे एक डाक-टिकट के पीछे लिखा जा सकता है. इस मिशन के पूरा होने के बाद सौर मंडल संबंधी किताबों को दोबारा लिखे जाने की ज़रूरत होगी.
एक वरिष्ठ नासा अधिकारी

'न्यू होराइज़न्स' के यान के निर्माण में 70 करोड़ डॉलर की लागत आई है.

यदि यान को मध्य फ़रवरी के बाद रवाना करना पड़ता तो नासा बृहस्पति ग्रह के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल इस यान को ऊपर उठाने के लिए नहीं कर पाता और ये यान प्लूटो तक वर्ष 2018 तक ही पहुँच पाता.

नासा के एक शीर्ष अधिकारी कॉलिन हार्टमैन कहते हैं, "प्लूटो के बारे में हमें जितनी जानकारी है उसे एक डाक-टिकट के पीछे लिखा जा सकता है."

उनका मानना है, "इस मिशन के पूरा होने के बाद सौर मंडल संबंधी किताबों को दोबारा लिखे जाने की ज़रूरत होगी."

यान की यात्रा

ग्रहों के अस्तित्व में आने की जानकारी एकत्र की जाएगी
पियानो के आकार के इस यान पर 33 किलोग्राम प्लूटोनियम ईंधन लदा हुआ है और इसी कारण परमाणु ऊर्जा के उपयोग के विरोधियों ने इसे छोड़े जाने पर आपत्ति जताई थी.

प्लूटो और उसके उपग्रहों का अध्ययन करने के बाद यान बर्फ़ीले पिंडों के अध्ययन के लिए सौर मंडल के बाहरी हिस्से की ओर रवाना हो जाएगा जो कि 'कुइपर बेल्ट' के नाम से जाना जाता है.

'कुइपर बेल्ट' धरती और सूरज के बीच की दूरी के 30 से 50 गुना से भी दूर स्थित है और माना जाता है कि सौर मंडल के इस हिस्से में दसियों हज़ार बर्फ़ीले पिंड मौजूद हैं.

उल्लेखनीय है कि कई खगोलविद प्लूटो को ग्रह मानने से इनकार करते हैं और उनका मानना है कि यह 'कुइपर बेल्ड' के पिंडों में से एक हो सकता है.

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