|
प्लूटो के लिए पहली बार यान रवाना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपनी 'न्यू होराइज़न्स' परियोजना के तहत पहली बार प्लूटो ग्रह के लिए यान सफ़लतापूर्वक रवाना किया है. प्लूटो सौर-मण्डल का एक मात्र ऐसा ग्रह है जिसकी खोजबीन नहीं हुई है और वैज्ञानिकों को सौर मंडल के ग्रहों में से सबसे कम जानकारी इसी ग्रह के बारे में है. इस यान को फ़्लोरिडा स्थित केप कैनेवरल अंतरिक्ष केंद्र से मंगलवार शाम रवाना करने की योजना थी लेकिन ख़राब मौसम के कारण इसे दो बार स्थगित करना पड़ा. 'किताबें दोबारा लिखी जाएँगी' ये यान पिछले किसी भी यान के मुकाबले में सबसे अधिक तेज़ी से छोड़ा गया ये अपनी पाँच अरब किलोमीटर की यात्रा नौ साल में पूरी करेगा. इस परियोजना का मकसद ग्रहों के अस्तित्व में आने के बारे में जानकारी हासिल करना होगा. 'न्यू होराइज़न्स' के यान के निर्माण में 70 करोड़ डॉलर की लागत आई है. यदि यान को मध्य फ़रवरी के बाद रवाना करना पड़ता तो नासा बृहस्पति ग्रह के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल इस यान को ऊपर उठाने के लिए नहीं कर पाता और ये यान प्लूटो तक वर्ष 2018 तक ही पहुँच पाता. नासा के एक शीर्ष अधिकारी कॉलिन हार्टमैन कहते हैं, "प्लूटो के बारे में हमें जितनी जानकारी है उसे एक डाक-टिकट के पीछे लिखा जा सकता है." उनका मानना है, "इस मिशन के पूरा होने के बाद सौर मंडल संबंधी किताबों को दोबारा लिखे जाने की ज़रूरत होगी." यान की यात्रा
प्लूटो और उसके उपग्रहों का अध्ययन करने के बाद यान बर्फ़ीले पिंडों के अध्ययन के लिए सौर मंडल के बाहरी हिस्से की ओर रवाना हो जाएगा जो कि 'कुइपर बेल्ट' के नाम से जाना जाता है. 'कुइपर बेल्ट' धरती और सूरज के बीच की दूरी के 30 से 50 गुना से भी दूर स्थित है और माना जाता है कि सौर मंडल के इस हिस्से में दसियों हज़ार बर्फ़ीले पिंड मौजूद हैं. उल्लेखनीय है कि कई खगोलविद प्लूटो को ग्रह मानने से इनकार करते हैं और उनका मानना है कि यह 'कुइपर बेल्ड' के पिंडों में से एक हो सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें प्लूटो अभियान पर ख़राब मौसम की मार17 जनवरी, 2006 | विज्ञान एस्टेरॉयड के नमूने लेने में सफलता26 नवंबर, 2005 | विज्ञान मंगल ग्रह धरती के क़रीब आया29 अक्तूबर, 2005 | विज्ञान क्रॉयसैट लाँच करते ही टूटकर बिखरा09 अक्तूबर, 2005 | विज्ञान 'मंगल उम्मीद से कहीं अधिक सक्रिय ग्रह'21 सितंबर, 2005 | विज्ञान ब्रह्मांड में धमाके से वैज्ञानिक उत्साहित12 सितंबर, 2005 | विज्ञान स्पिरिट ने मंगल की नई तस्वीरें भेजीं08 सितंबर, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||