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एस्टेरॉयड के नमूने लेने में सफलता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक जापानी अंतरिक्ष यान ने एक एस्टेरॉयड या क्षुद्र ग्रह के नमूने जुटाने में सफलता पाई है. इस अभियान से जुड़े जापानी वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी है. रिपोर्टों के अनुसार हयाबुसा नामक(जापानी भाषा में बाज) यान ने इटोकावा नामक एस्टेरॉयड को छुआ और उसकी सतह पर धातु का गोला दाग कर धूलनुमा नमूने एकत्रित किए. पहली बार एक यान को किसी एस्टेरॉयड की सतह के नमूने एकत्रित करने में सफलता मिली है. हालाँकि हयाबुस यान ने किस तरह के नमूने लिए हैं ये 2007 में उसके धरती पर वापस लौटने के बाद ही ठीक-ठीक पता चल सकेगा. इससे पहले चाँद की सतह के नमूने का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा चुका है. किसी एस्टेरॉयड के नमूने को धरती पर लाया जाना इस कारण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाएगा कि इन पिंडों का निर्माण सौर-मंडल के जन्म के दौरान ही हुआ है. ऐसे में इटोकावा के नमूने के अध्ययन से सौर-मंडल के निर्माण की गुत्थी को सुलझाने में मदद मिलेगी. कुछ सेकेंड का साथ जापानी एरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी(जाक्सा) के वैज्ञानिकों के अनुसार हयाबुसा और इटोकावा का मिलन कुछ ही सेकेंड के लिए हो पाया. उल्लेखनीय है कि इटोकावा धरती से 29 करोड़ किलोमीटर दूर है. हयाबुसा यान को मई 2003 में छोड़ा गया था. यह वापसी की यात्रा दिसंबर में शुरू करेगा. इससे पहले गत रविवार को हयाबुसा ने इटोकावा को छुआ था लेकिन तब क्षुद्र ग्रह की सतह के नमूने नहीं लिए जा सके थे. | इससे जुड़ी ख़बरें उल्का गिरने से 20 ज़ख़्मी | भारत और पड़ोस धरती से दूर जीवन?29 सितंबर, 2002 | पहला पन्ना सितारों तक पहुँचना संभव होगा?14 मई, 2002 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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