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रविवार, 09 अक्तूबर, 2005 को 08:01 GMT तक के समाचार
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क्रॉयसैट लाँच करते ही टूटकर बिखरा
क्रायोसैट
यूरोपीय अंतरिक्ष एजंसी ने पुष्टि की है कि पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया में हिमसागर किस तरह से प्रतिक्रिया करते हैं, यह पता लगाने के लिए जो उपग्रह क्रॉयसैट लाँच किया था, वह रूस के तटवर्ती इलाक़ों में जा गिरा है.

क्रॉयसैट लाँच करने के कुछ ही मिनटों बाद आर्कटिक महासागर में जा गिरा. इसे रूस के उत्तरी हिस्से में एक स्टेशन से छोड़ा गया था.

क़रीब नौ करोड़ पाउंड की लागत से बने इस उपग्रह क्रॉयसैट को यह पता लगाने के लिए छोड़ा गया था कि पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन के लिए हिमसागर किस तरह की प्रतिक्रिया करते हैं.

वैज्ञानिकों ने इस नाकामी को एक बड़ा हादसा बताया है और अगला मिशन लाँच करने में फिर से कई वर्षों का समय लग सकता है और इतना ही नहीं, फिर से भारी धन की भी ज़रूरत होगी.

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि यह रूस के प्लेसेत्स्क नामक स्टेशन से शनिवार को छोड़ा गया लेकिन अधिकारियों ने कहा कि उड़ान के कुछ ही मिनट बाद यह उपग्रह टुकड़े-टुकड़े हो गया और समुद्र में जा गिरा.

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी में एक निदेशक वोल्कर लीबिग ने कहा कि जिन वैज्ञानिकों ने इस मिशन पर कई वर्षों तक काम किया है उनके लिए यह एक हादसे के बराबर है.

उन्होंने कहा, "यूरोप के बहुत से वैज्ञानिकों और इस मिशन में शामिल टीम के लिए यह एक त्रासदी है."

वोल्कर ने कहा कि यह मिशन फिर से तैयार किया जाता है यह धन की उपलब्धता पर निर्भर करेगा.

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सदस्य देश दिसंबर में फ़ैसला करेंगे कि इस मिशन को फिर से शुरू किया जाए या नहीं. क्रॉयसैट मिशन सेंटर के एक वैज्ञानिक मार्क ड्रिंकवाटर ने कहा कि ऐसा मिशन फिर से तैयार करने में कई वर्ष का समय लग सकता है.

उन्होंने कहा, "मैं उन वैज्ञानिकों की टीम से खेद प्रकट करता हूँ जिन्होंने इस मिशन को तैयार करने में अपना पूरा करियर लगा दिया."

मिशन

ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन के वैज्ञानिक डंकन विंगहम ने सात साल पहले इस मिशन का प्रस्ताव रखा था. उन्होंने कहा कि यूरोप या अमरीका में और कोई ऐसा सेटेलाइट नहीं है जो क्रॉयसैट का काम कर सके.

उन्होंने कहा, "अंतरिक्ष एक जोखिम भरा काम है, यह हमेशा से ही ऐसा रहा है, यह हमेशा बिना किसी ग़लती के नहीं पूरा हो सकता."

"हमें अब यह सोचना होगा कि इस नाकामी के बिंदू से हम कहाँ के लिए शुरूआत करेंगे."

यह उपग्रह पृथ्वी पर मौजूद हिम परतों के बारे में जानकारी मुहैया कराने के मक़सद से तैयार किया गया था.

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