कोरोना वायरस का टीका या दवा बनाने के कितने करीब हैं हम?

कोरोना वायरस

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    • Author, गुरप्रीत सैनी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

कोरोना वायरस ने दुनियाभर में कहर बरपाया हुआ है. लेकिन अबतक कोई इलाज या दवा नहीं बन पाई है, जो इस वायरस को ख़त्म कर दे.

ये सवाल लगातार उठ रहा है कि कोरोना वायरस से जान बचाने वाली दवा या टीका कब तक बन जाएगा? कब तक बनेगा कोरोना का टीका यानी वैक्सीन? इसके लिए रिसर्च पूरे ज़ोरों से चल रही है. 20 से ज़्यादा वैक्सीन बनाने का काम जारी है.

एक वैक्सीन का तो इंसानों पर ट्रायल भी शुरू कर दिया गया है, ताकि इसके असर का पता लगाया जा सके. दूसरे वैज्ञानिक अभी जानवरों पर रिसर्च की स्टेज पर हैं और इस साल के अंत तक इंसानों को इससे फायदा मिलने की उम्मीद कर रहे हैं.

परीक्षण जारी है और वैज्ञानिकों का दावा है कि वैक्सीन आने में एक साल का वक्त लग सकता है. लेकिन अगर वैज्ञानिकों ने इस साल कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन बना भी ली, तो भी इसका बड़ी संख्या में उत्पादन होने में वक्त लगेगा.

इसका मतलब ये है कि अगला आधा साल बीत जाने के बाद ही कोई वैक्सीन तैयार हो पाएगी. यहां ये याद रखने की ज़रूरत है चार तरह के कोरोना वायरस हैं, जो इंसानों के बीच फैल रहे हैं. इनमें से किसी भी वायरस से होने वाली दिक्कतों के लिए हमारे पास वैक्सीन नहीं है.

वीडियो कैप्शन, दिल्ली के पहले कोरोना मरीज़ ने बाक़ी मरीज़ों से क्या कहा?

ब्रिटेन में कोशिशें

बीबीसी ने ब्रिटेन की एक लैब का दौरा किया और वैक्सीन तैयार करने की कोशिशों का जायज़ा लिया. ईस्ट लंदन के एक क्वारंटाइन केंद्र में श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाले वायरस के मरीज़ों की निगरानी कर रहे हैं. ये ऐसे कार्यकर्ता हैं, जो पैसे लेकर ख़ुदपर वैक्सीन और ड्रग्स का परीक्षण कराते हैं.

यहां के दूसरे वॉलंटियर में जल्दी ही कोरोना वायरस का हल्का संक्रमण कराया जाएगा. hVIVO सर्विस के चीफ़ साइंटिस्ट एंड्रूयू कैचपोल कहते हैं, "हम स्वस्थ्य वॉलंटियर को कोरोना वायरस की एक किस्म में पहले संक्रमित करेंगे, फिर उनकी निगरानी करेंगे और फिर उन्हें दोबारा स्वस्थ करेंगे."

इससे नियंत्रित मानवीय संकट मॉडल कहा जाता है. इस प्रक्रिया के ज़रिए वायरस को लेकर वैज्ञानिकों की समझ बेहतर होगी. वॉलंटियर को करीब साढ़े तीन हज़ार डॉलर दिए जाएंगे और उन्हें दो हफ्ते के लिए एक कमरे में रहना होगा.

ये बताना ज़रूरी है कि यहां वॉलंटियर को कोविड-19 से संक्रमित नहीं कराया जाएगा, बल्कि उन्हें इससे काफी कमज़ोर वायरस से संक्रमित कराया जाएगा, लेकिन यहां के वैज्ञानिकों को यकीन है कि इसके ज़रिए बेहद अहम जानकारियां हासिल होंगी.

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वीडियो कैप्शन, कोरोना के वैक्सीन की तैयारी

डॉक्टरों के मुताबिक इससे एंटी वायरल दवाएं और वैक्सीन तैयार करने की रफ्तार तेज़ करने में मदद मिलेगी. साथ ही इससे ये जल्दी समझ आ जाता है कि ये उत्पाद लाभकारी साबित होगा या नहीं.

वैक्सीन को कोरोना की वजह से पैदा हुए वैश्विक संकट का एक लौता हल माना जा रहा है. इसकी खोज ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को एकजुट कर दिया है.

इम्पीरियल कॉलेज में संक्रमण रोग विभाग के जॉन ट्रेगोनिंग कहते हैं, "ये रेस आपस में नहीं, बल्कि वायरस से है. नई वैक्सीन तैयार करने के लिए बड़े पैमाने पर कोशिश जारी है. हम देख रहे हैं कि बीते कई सालों से अलग-अलग स्तर पर जो तैयारियां की गई हैं. उनके क्लीनिकल ट्रायल किए जा रहे हैं."

विल्टशर के एक रिसर्च सेंटर में इसी हफ़्ते जानवरों पर वैक्सीन का परीक्षण शुरू होना है. ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी में इंसानों पर शुरुआती सेफ्टी ट्रायल अगले महीने शुरू हो सकते हैं. ये एक ऐसी चुनौती है जिस पर दुनिया भर में तमाम ज़िंदगियां निर्भर करती हैं.

वीडियो कैप्शन, कोरोना के वैक्सीन की तैयारी

अमरीका में वैक्सीन का परीक्षण

अमरीका में भी कोरोना वायरस से बचाने वाले वैक्सीन के मानव परीक्षण की शुरुआत कर दी गई है. समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक़, वॉशिंगटन में सिएटल की काइज़र परमानेंट रिसर्च फ़ैसिलिटी में चार मरीज़ों को ये वैक्सीन दी गई है.

इस वैक्सीन की वजह से कोविड 19 बीमारी नहीं हो सकती है लेकिन इसमें वायरस से निकाला गया एक हानिरहित जेनेटिक कोड है. विशेषज्ञों के मुताबिक़, अभी ये तय करने में कई महीनों का वक़्त लगेगा कि ये वैक्सीन कामयाब होगी या नहीं.

दुनिया भर में वैज्ञानिक इस शोध पर तेज़ी से काम कर रहे हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ ने इस वैक्सीन पर चल रहे काम के लिए वित्तीय मदद दी है.

सामान्य तौर पर किसी भी वैक्सीन का पहला परीक्षण जानवरों पर किया जाता है, लेकिन इस बार इसका सीधा मानवीय परीक्षण किया गया है.

लेकिन मॉडेर्ना थेरेपटिक्स नाम की बायोटेक्नोलॉजी कंपनी कहती है कि इस वैक्सीन को ट्रायड और टेस्टेड प्रक्रिया के तहत तैयार किया गया है.

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क्या ये टीके सभी उम्र के लोगों को बचाएंगे?

हां बिल्कुल. लेकिन बेशक ये सब वैक्सीन बूढ़े लोगों में कम प्रभावी हो सकती है. ऐसा वैक्सीन की वजह से नहीं होगा, बल्कि इसलिए होगा क्योंकि बूढ़े लोगों का इम्यून सिस्टम कमज़ोर होता है. आम तौर पर होने वाले फ्लू में भी यही चीज़ देखी जाती है.

क्या इसके साइड इफेक्ट होंगे?

सामान्य पैन-किलर समेत सभी दवाइयों के साइड इफेक्ट होते ही हैं. लेकिन क्लिनिकल ट्रायल किए बिना ये बता पाना नामुमकिन है कि एक्सपेरिमेंटल वैक्सीन का साइड इफेक्ट क्या हो सकता है.

इस पहलू पर रेगुलेटर्स का ख़ास ध्यान रहेगा.

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वैक्सीन किसे मिलेगी?

अगर वैक्सीन बना ली जाएगी तो शुरू में उसकी स्पलाई सीमित होगी. इसलिए कम से कम शुरुआत में इसकी प्राथमिकता तय की जाएगी.

जो स्वास्थ्य कर्मी कोविड-19 से संक्रमित मरीज़ों के संपर्क में आ गए हैं, वो लिस्ट में सबसे ऊपर होंगे.

बीमारी का सबसे ज़्यादा असर बूढ़े लोगों पर हो रहा है, इसलिए अगर दवा उनके एज ग्रूप पर असरदार है तो वो भी प्राथमिकता पर होंगे.

हालांकि उन लोगों को दवा देना भी बेहतर होगा, जो बूढ़े लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

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दवा या ड्रग्स का क्या?

डॉक्टर मौजूदा एंटी-वायरस दवाओं की टेस्टिंग कर रहे हैं. ताकि ये पता लगाया जा सके कि क्या वो कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ काम कर सकती हैं.

प्रभावित देशों के अस्पतालों में इसके ट्रायल किए जा रहे हैं. लेकिन फरवरी में विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक डॉक्टर ने कहा था कि फिलहाल सिर्फ एक ड्रग है जो हमें लगता है कि प्रभावी हो सकता है और वो है remdesivir."

इसे इबोलो के ड्रग के रूप में विकसित किया गया था. लेकिन समझा जाता है कि इससे और भी कई तरह के वायरस मर सकते हैं. हालांकि हम अभी भी इसके नतीजों का इंतज़ार कर रहे हैं.

इसकी भी उम्मीद लगाई गई कि एचआईवी ड्रग (lopinavir and ritonavir) असरदार हो सकते हैं, लेकिन इसका ट्रायल डेटा निराशाजनक रहा. कोविड-19 के गंभीर मरीज़ों पर इसका असर नहीं हुआ.

इसके अलावा पुराने और कम कीमत वाले एंटी मलेरिया ड्रग - chloroquine से भी उम्मीद लगाई गई. लैब में हुए परीक्षण के नतीजों ने दिखाया कि ये वायरस को मार सकता है. लेकिन मरीज़ों पर इसका क्या असर होगा, इसके नतीज़ों का हम इंतज़ार कर रहे हैं.

अमरीका और दूसरे देशों में ट्रायल जारी हैं.

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