कोरोना वायरस किनके लिए ज़्यादा ख़तरनाक, ऐसे ही 11 सवालों के जवाब

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दुनिया भर के 188 से भी ज़्यादा देशों में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले सामने आए हैं.

इसकी चपेट में आए लोगों की संख्या चार करोड़ 23 लाख से ज़्यादा हो चुकी है जबकि अब तक इस महामारी से अब तक 11 लाख 46 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे एक महामारी घोषित किया है.

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1. कोरोना के संक्रमण और उसके लक्षण सामने आने में कितना समय लगता है?

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वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस से संक्रमण के बाद इसके लक्षण सामने आने में पांच दिनों का समय लगता है लेकिन कुछ लोगों में इसके लक्षण दिखने में इससे ज़्यादा वक़्त भी लग सकता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के लक्षण 14 दिनों तक रहते हैं. लेकिन कुछ शोधकर्ताओं की राय में इसके लक्षण 24 दिनों तक रह सकते हैं.

इनक्यूबेशन पीरियड या बीमारी के सामने आने में लगने वाले समय को जानना और समझना ज़रूरी है.

इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग को ज़्यादा बेहतर और प्रभावी तरीके से कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर कदम उठाने में मदद मिलती है.

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2. कोरोना से संक्रमण के बाद ठीक होने वाले लोग दोबारा संक्रमित नहीं होंगे?

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फ़िलहाल ये कहना जल्दबाज़ी होगी. इस वायरस के बारे में अभी दिसंबर में ही पता चला है.

वायरस संक्रमण के दूसरे मामलों से जुड़े अतीत के अनुभव बताते हैं कि रोग रोग प्रतिरोधकों के ज़रिये इससे बचाव किया जा सकता है.

सार्स और कोरोना परिवार के अन्य विषाणुओं को लेकर हमारी राय ये है कि दोबारा संक्रमित होने के आसार कम हैं.

लेकिन चीन से मिलने वाली कुछ रिपोर्टों में ये कहा गया है कि हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने के बाद भी कुछ लोगों के टेस्ट पॉज़िटिव पाए गए हैं पर हम उन टेस्ट को लेकर पक्के तौर पर कुछ नहीं कह सकते.

हालांकि गौर करने वाली बात ये है कि ऐसे लोगों से अब संक्रमण का कोई ख़तरा नहीं था.

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3. फ़्लू और कोरोना वायरस में क्या अंतर है?

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कोरोना वायरस और फ़्लू (बुखार और संक्रामक जुकाम) के कई लक्षण एक जैसे हैं. बिना मेडिकल टेस्ट के इसके अंतर को समझना मुश्किल है.

कोरोना वायरस के प्रमुख लक्षण बुखार और सर्दी ही है. फ्लू में अक्सर दूसरे लक्षण भी दिखाई देते हैं जैसे गले में दर्द.

जबकि कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति को सांस की तकलीफ़ की शिकायत रहती है.

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4. खुद को एकांत में कैसे रखें?

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सेल्फ़ आइसोलेशन यानी खुद को एकांत में रखने का मतलब 14 दिनों तक घर में रहना, काम पर नहीं जाना, स्कूल या किसी अन्य सार्वजनिक जगह पर नहीं जाना और सार्वजनिक परिवहन और टैक्सी से दूर रहना.

आपको घर के भीतर भी खुद को परिवार के दूसरे लोगों से अलग रखना चाहिए.

अगर आपको घरेलू सामानों की ज़रूरत हैं या कोई दवा चाहिए या फिर कोई शॉपिंग करनी है तो मदद लें, दरवाज़े पर डिलेवरी हो सकती है लेकिन आप किसी को घर आने के लिए न कहें.

आप को अपने पालतू पशुओं से भी दूर रहना चाहिए लेकिन अगर ये मुमकिन न हो तो उन्हें छूने से पहले और बाद ठीक से हाथ ज़रूर साफ़ करें.

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5. अस्थमा के मरीज़ों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक़?

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हमारे श्वसन तंत्र या हमारी सांस लेने की प्रणाली में किसी भी तरह का संक्रमण, वो चाहे कोरोना वायरस ही क्यों न हो, अस्थमा की तकलीफ़ बढ़ा सकता है.

कोरोना वायरस को लेकर चिंतित अस्थमा के मरीज़ कुछ एहतियाती कदम उठा सकते हैं. इसमें डॉक्टर द्वारा सुझाए गए इनहेलर का इस्तेमाल भी शामिल है.

इससे कोरोना सहित किसी वायरस किसी वजह से पड़ने वाले अस्थमा के दौरे का ख़तरा कम होता है.

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6. क्या कोरोना का संक्रमण फ़ोन से भी हो सकता है?

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माना जाता है कि कोरोना वायरस का संक्रमण छींकने या खांसने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हो सकता है. लेकिन जानकारों का कहना है कि ये वायरस किसी सतह पर भी अस्तित्व में रह सकता है और वो भी संभवतः कई दिनों तक.

इसलिए ये अहम है कि आपका फ़ोन चाहे घर पर हो या दफ़्तर में पूरी तरह से बार-बार साफ़ हो. सभी प्रमुख फ़ोन बनाने वाली कंपनियां मोबाइल फ़ोन को एल्कोहॉल से, हैंड सैनिटाइज़र से या स्टरलाइजिंग वाइप्स से साफ़ करने को लेकर आगाह करती हैं क्योंकि इससे फोन की कोटिंग को नुक़सान होने का ख़तरा रहता है.

इस कोटिंग लेयर को नुक़सान पहुंचने से कीटाणुओं के लिए मोबाइल फोन में फंसे रहना आसान हो जाता है. आजकल जो मोबाइल फ़ोन आते हैं, उनके बारे में कहा जाता है कि वे वाटर रेजिस्टेंस होते हैं यानी पानी से उनको कम ख़तरा रहता है.

अगर ऐसा है तो आप फ़ोन को साबुन और पानी या फिर पेपर टॉवल से साफ़ कर सकते हैं लेकिन ऐसा करने से पहले ये ज़रूर जांच लें कि आपका फोन वाटर रेजिस्टेंस है या नहीं.

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7.क्या कोरोना दरवाज़े के हैंडल से भी फैल सकता है?

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अगर कोई संक्रमित व्यक्ति छींकते वक़्त मुंह पर हाथ रखता है और फिर उसी हाथ से वो किसी चीज़ को छूता है तो वो सतह विषाणु युक्त हो जाती है.

दरवाज़े के हैंडल ऐसी सतहों के अच्छे उदाहरण हैं जिससे दूसरे लोगों को संक्रमण का ख़तरा हो सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस किसी सतह पर भी अस्तित्व में रह सकता है और वो भी कई दिनों तक.

इसलिए सबसे अच्छा यही है कि आप हाथ नियमित रूप से धोते रहें ताकि संक्रमण का ख़तरा कम हो और कोरोना वायरस को फैलने से रोका जा सके.

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8. स्वीमिंग पूल में तैरना कितना सुरक्षित?

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ज़्यादातर स्वीमिंग पूल्स में क्लोरीन मिलाया जाता है. ये एक ऐसा रसायन है जिससे विषाणु ख़त्म जाते हैं.

इसलिए अगर किसी स्वीमिंग पूल में क्लोरीन का इस्तेमाल किया जा रहा है तो उसमें तैरना सुरक्षित है.

लेकिन इसके बावजूद आप चेंजिंग रूम या फिर किसी संक्रमित सतह जैसे दरवाज़े के हैंडल के संपर्क में आने के बाद संक्रमित हो सकते हैं.

और अगर वहां कोई संक्रमित व्यक्ति आपके नजदीक छींकता या खांसता है तो आपके भी संक्रमित होने का ख़तरा बना रहेगा.

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9. मास्क पहनना कितना ज़रूरी?

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हालांकि डॉक्टर लोग हमेशा ही मास्क पहने हुए दिखते हैं लेकिन इस बात के प्रमाण कम ही मिलते हैं कि आम लोगों के मास्क पहनने से चीज़ें बदल जाती हैं.

ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए वो मास्क पहनने की सिफ़ारिश नहीं करता है.

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड का कहना है कि हॉस्पिटल के माहौल के बाहर मास्क पहनने से किसी व्यापक फायदे के प्रमाण ज़्यादा नहीं मिलते हैं.

विशेषज्ञों की राय में साफ़-सफ़ाई जैसे कि नियमित रूप से हाथ धोना ज़्यादा असरदार है.

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10. बच्चों के लिए कितना ख़तरा?

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चीन से मिल रहे आंकड़ों के अनुसार बच्चे तुलनात्मक रूप से कोरोना संक्रमण से बचे हुए हैं.

हालांकि जिन बच्चों को फेफड़े की बीमारी है या फिर अस्थमा है, उन्हें ज़्यादा सावधान रहने की ज़रूरत है क्योंकि ऐसे मामलों में कोरोना वायरस हमला कर सकता है.

ज़्यादातर बच्चों के लिए ये श्वसन संबंधी सामान्य संक्रमण की तरह है इसके बावजूद यह माना जा रहा है कि बच्चों की इम्यूनिटी कम होने से वे कोरोना की चपेट में आसानी से आ सकते हैं.

यही वजह है कि भारत सरकार ने कोरोना संबंधी अपने निर्देशों में दस साल से कम उम्र के बच्चों को घर में रखने का निर्देश जारी किया है.

इसके अलावा सभी स्कूल बंद हैं, हालांकि कई स्कूल इस दौरान ऑनलाइन क्लासों को संचालित कर रहे हैं.

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11. संक्रमित व्यक्ति के हाथ का बना खाना कितना नुक़सानदेह?

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संक्रमित व्यक्ति ने खाना बनाते वक़्त अगर साफ़-सफ़ाई का ठीक से ख़्याल न रखा हो तो इससे कोरोना वायरस के फैलने का ख़तरा रहता है.

छींकने या खांसने से हाथ पर लगी कफ़ के छोटे से हिस्से से भी कोरोना वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है. कीटाणुओं को फैलने से रोकने के लिए खाना खाने और छूने से पहले हाथ तरीके से धोये जाएं, इसकी सलाह हमेशा दी जाती है.

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