BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 03 अप्रैल, 2009 को 05:58 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
पार्टियों से जमाते इस्लामी की माँग

मुस्लिम
जमाते इस्लामी ने अपनी मांगों के समर्थन में पूरे राज्य से क़रीब एक करोड़ हस्ताक्षर जमा किए हैं
भारतीय मुसलमानों के सबसे बड़े धर्मिक और सामाजिक संगठन जमाते इस्लामी ने तमाम बड़े राजनीतिक दलों के सामने सात माँगों पर आधारित एक चार्टर रखा है.

इनमें से आधी माँगे सभी भारतवासियों से संबंधित हैं जबकि आधी माँगों का संबंध देश के मुस्लिम अल्पसंख्यकों से है.

जमाते इस्लामी की आंध्र प्रदेश में राजनीतिक दलों के सामने रखी जाने वाली माँगों में सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता में आने से रोकना, हर परिवार के कम से कम एक व्यक्ति को साल भर रोज़ग़ार की गारंटी और किसानों और दूसरे ग़रीब कामग़ारों को बिना किसी ब्याज के ऋण उपलब्ध कराना शामिल है.

इसके अलावा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने और प्रशासन को भ्रष्टाचार और अपराधीकरण से मुक्त कराने की माँग भी रखी गई है.

जमाते इस्लामी ने अपनी मांगों के समर्थन में पूरे राज्य से क़रीब एक करोड़ हस्ताक्षर जमा किए हैं और अब वो इस बारे में कांग्रेस और तेलुगूदेशम से बातचीत कर रही है.

जमात की आँध्र प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष एसएम मलिक का कहना था, "यह सिर्फ़ जमाते इस्लामी का घोषणापत्र नहीं है, हमारी कोशिश है कि यह घोषणापत्र अवाम में जाए और अवाम इसको क़बूल करे. हम दूसरी पार्टियों से बात करेंगे कि हमारे पास लोग हैं, अवाम है अगर वो हमारे घोषणापत्र को पसंद करते हैं तो उन्हें इसे क़बूल कर लेना चाहिए."

समस्याओं पर ज़ोर

उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि राजनीतिक दल लिखकर तहरीर दें कि वे इस घोषणापत्र पर अमल करने की कोशिश करेंगे. जमाते इस्लामी इस पर गौर करेगा कि इस घोषणापत्र पर अमल हो रहा है या नहीं."

जमाते इस्लामी का कहना है...
 इस समय हम चाहे सियासत में पूरा दख़ल न दें लेकिन सियासत पर असर ज़रूर डालना चाहेंगे. इस तरह हम चाहेंगे कि मुल्क़ के मामलों और समस्याओं का हल हो जाए. हमने सिर्फ़ मुसलमानों की समस्याओं को नहीं लिया है बल्कि हम चाहते हैं कि इस मुल्क़ की समस्याओं का हल निकले
एसएम मलिक

जमात के अलावा युनाइटेड मुस्लिम फ़ोरम ने भी अपना एक चुनावी घोषणापत्र जारी किया है जिसका पूरा ज़ोर मुस्लिम समुदाय की समस्याओं पर है.

जमात ने सुप्रीम कोर्ट की सिफ़ारिशों के अनुसार पुलिस में मुसलमानों को 25 प्रतिशत जगह देने और रोज़गार में दस प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित रंगनाथ मिश्रा कमीशन को लागू करने, सांप्रदायिक दंगों के विरुद्ध कानून बनाने जैसी माँगें की है.

जबकि यूनाइटेड मुस्लिम फ़ोरम की माँग है कि आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई के नाम पर निर्दोष मुस्लिम युवाओं को निशाना बनाने वाले अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए और जो युवा अदालत में निर्दोष साबित हों उन्हें मुआवज़ा दिया जाए और मीडियो को मुसलमानों को बदनाम करने वाली रिपोर्टों के प्रचार से रोका जाए.

दोनों ही संगठनों ने मुसलमानों की चल-अचल संपत्ति की सुरक्षा पर भी ज़ोर दिया है.

बेरोज़ग़ारी

जमात की इन माँगों पर हैदराबाद के मुहम्मद वहीद कहते हैं, "मुसलमानों के बच्चों को नौकरी चाहिए क्योंकि मुसलमानों में बेरोज़ग़ारी बहुत हैं. लोन मिलने चाहिए, बच्चों को पढ़ाई के लिए सहूलियतें मिलनी चाहिए. हर आनेवाली हुकूमत मुसलमानों को आस बंधाती है लेकिन बाद में सब कुछ भूल जाती है."

आम मुसलमान की उम्मीद
 मुसलमानों की बहुत सी समस्याएँ हैं जिनमें पहली समस्या बेरोज़ग़ारी है. इसके अलावा बच्चों को तालीम में स्कॉलरशिप मिलना चाहिए. पुलिस भी मुसलमानों पर बहुत ज़ुल्म कर रही है और बेक़सूर मुसलमानों के बच्चों को मुजरिम बना कर जेल में डाल देती है
फज़ीलुद्दीन

कॉलेज में पढ़ाई कर रहे फज़ीलुद्दीन का कहना है, "मुसलमानों की बहुत सी समस्याएँ हैं जिनमें पहली समस्या बेरोज़ग़ारी है. इसके अलावा बच्चों को तालीम में स्कॉलरशिप मिलना चाहिए. पुलिस भी मुसलमानों पर बहुत ज़ुल्म कर रही है और बेक़सूर मुसलमानों के बच्चों को मुजरिम बना कर जेल में डाल देती है."

जमाते इस्लामी ने अपने समर्थन के लिए लिखित समझौते की जो शर्तें रखी हैं उन्हें कोई राजनीतिक दल स्वीकार करता है या नहीं, यह अभी देखना बाक़ी है लेकिन जमात का कहना है कि वो राजनीति पर बाहर से दबाव डालने का प्रयास करती रहेगी.

एसएम मलिक कहते हैं, "इस समय हम चाहे सियासत में पूरा दख़ल न दें लेकिन सियासत पर असर ज़रूर डालना चाहेंगे. इस तरह हम चाहेंगे कि मुल्क़ के मामलों और समस्याओं का हल हो जाए. हमने सिर्फ़ मुसलमानों की समस्याओं को नहीं लिया है बल्कि हम चाहते हैं कि इस मुल्क़ की समस्याओं का हल निकले."

उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि जो पार्टी हमारी मदद चाहती हो वह हमारे सात बिंदुओं को क़बूल करे और उसके ज़रिए से कुछ समस्याएं हल हों."

यह बात बिलकुल स्पष्ट है कि आंध्र प्रदेश के मुसलमान समुदाय में राजनीतिक चेतना और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की आवश्यकता का आभास हर चुनाव के साथ बढ़ता जा रहा है.

महमूद मदनीबीबीसी एक मुलाक़ात..
सुलझे हुए विचारों वाले मज़हबी और सामाजिक नेता महमूद मदनी के साथ.
नमाज़ अदा करते मुसलमानमानवाधिकार हनन...
भारत में अल्पसंख्यकों से जुड़े मानवाधिकार हनन के मामले बढ़े हैं.
समझौता एक्सप्रेस में धमाके के बादसांप्रदायिक 'आतंकवाद'!
भारत में सांप्रदायिकता ने अब आतंकवाद का रूप धारण कर लिया है...
भारतीय पुलिसजीने का अधिकार?
क़ानूनी प्रक्रिया के बिना जीने का अधिकार नहीं छीना जा सकता, मगर?
निंदनीय विचार
परमाणु करार को धर्म और संप्रदाय से जोड़ने की कोशिश निंदनीय है.
मुस्लिम छात्र'आतंकवाद' के ख़िलाफ़
देवबंद में आयोजित इस्लामी सम्मेलन में 'आतंकवाद' की आलोचना...
इससे जुड़ी ख़बरें
'मुस्लिमों के प्रति भेदभाव ख़त्म हो'
27 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस
सच्चर रिपोर्ट संसद में पेश की गई
30 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस
न्याय से ही न्याय के लिए उठते सवाल
20 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस
आतंकवाद पर चर्चा करेंगे उलेमा
17 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस
'अभी आरक्षण लागू न करे विश्वविद्यालय'
24 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>