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सोमवार, 14 जुलाई, 2008 को 11:54 GMT तक के समाचार
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महंगाई भी थी समर्थन वापसी की वजह
वामपंथी नेता
रैली में शीर्ष वामपंथी नेता शामिल हुए
केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद वामपंथी दलों ने सोमवार से एक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया है. अभियान का मक़सद लोगों को समर्थन वापसी की वजह बताना है.

परमाणु समझौते को आगे ले जाने की दिशा में आईएईए में जाने के सरकार के फ़ैसले पर वामपंथी दलों ने समर्थन वापस ले लिया था.

लेकिन अब वामपंथी दलों का कहना है कि परमाणु समझौते और बढ़ती क़ीमतों पर उन्होंने सरकार से समर्थन वापस लिया है.

इस महीने की 22 तारीख़ को संसद के विशेष सत्र में विश्वास प्रस्ताव पर मतदान होगा.

इस बीच वामपंथी दलों ने जनता के सामने अपनी बात रखने के लिए अभियान की शुरुआत की है. अभियान की शुरुआत दिल्ली में एक रैली से हुई. जिसमें वामपंथी दलों के कई शीर्ष नेता शामिल हुए.

विकल्प

वामपंथी नेताओं ने यूपीए सरकार नाकामियाँ गिनाईं. उन्होंने बढ़ती महंगाई और राष्ट्रहित की अनदेखी करने के कारण सरकार की आलोचना की. साथ ही साझा न्यूनतम कार्यक्रम को नज़रअंदाज़ करने का भी आरोप लगाया.

 इस अभियान की शुरुआत इसलिए की गई है ताकि लोगों को समर्थन वापसी की वजह बताई जाए. सरकार की अमरीका समर्थन और जन विरोधी नीतियों के कारण ही क़ीमतें बढ़ रही हैं और देश को अन्य कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है
प्रकाश कारत

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत ने कहा, "इस अभियान की शुरुआत इसलिए की गई है ताकि लोगों को समर्थन वापसी की वजह बताई जाए. सरकार की अमरीका समर्थन और जन विरोधी नीतियों के कारण ही क़ीमतें बढ़ रही हैं और देश को अन्य कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है."

उन्होंने बताया कि वामपंथी दल ऊर्जा की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए लोगों के सामने विकल्प भी रखेंगे.

साथ ही किसानों, ग़रीबों, कामगारों और अन्य वर्गों के लिए हानिकारक सरकार की आर्थिक नीतियों का विकल्प भी जनता के सामने पेश करेंगे.

वामपंथी दलों ने सोमवार से अभियान की शुरुआत की

कारत ने कहा कि सरकार और कांग्रेस अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को दिया अपना वादा पूरा करना चाहते हैं और यही उनका पहला लक्ष्य है, सरकार मुद्रा स्फ़ीती और बढ़ती क़ीमतों को क़ाबू नहीं कर रही.

उन्होंने कहा, "परमाणु समझौते और बढ़ती क़ीमतों के मुद्दे पर हमने सरकार से समर्थन वापस लिया है." वामपंथी दलों के इस अभियान के तहत शीर्ष नेता देश के कई हिस्सों का दौरा करेंगे और रैली आयोजित की जाएगी.

वामपंथी दलों का कहना है कि इस अभियान के तहत मुख्य रूप से देश के युवा वर्ग को परमाणु समझौते के नुक़सान के बारे में बताया जाएगा.

एमके नारायणनकरार नहीं समझता वाम
एमके नारायणन ने कहा है कि वामदल परमाणु करार की तकनीकियाँ नहीं समझते.
एबी बर्धनफिर कांग्रेस को साथ?
सीपीआई नेता बर्धन भविष्य में ऐसी किसी संभावना से इनकार नहीं करते.
अमर सिंह'डील में डील नहीं'
अमर सिंह कहते हैं कि समझौते के समर्थन के लिए कोई सौदा नहीं हुआ.
मनमोहन सिंह'सरकार स्थिर है'
मनमोहन सिंह ने कहा कि उनकी सरकार की स्थिरता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
सीताराम येचुरी और प्रवण मुखर्जीप्यार कम तकरार ज़्यादा
चार बरसों का वामदलों और यूपीए सरकार का संबंध तकरार वाला ही रहा है.
वामपंथीसमर्थन वापसी का पत्र
वामपंथियों ने प्रणव मुखर्जी को भेजे पत्र में कहा है कि अब वक़्त आ गया है.
प्रकाश करातअब बहुत हो गया..
समर्थन वापसी की घोषणा के समय गोपालन भवन का मंज़र देखने लायक था.
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