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ज्योति बसु से मिले प्रणब मुखर्जी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने रविवार को कोलकाता में सीपीएम के वरिष्ठ नेता ज्योति बसु से मुलाकात कर वामपंथियों और यूपीए के क़रार के टूटने की वजह बताई. दोनों नेताओं की 15 मिनट चली इस मुलाक़ात के बाद प्रणब मुखर्जी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि वो ज्योति बसु को ये बताने आए थे कि दोनों दलों के बीच चला चार साल दो महीने पुराना क़रार क्यों टूटा. "मैंने ज्योति बाबू से दो वजह से मुलाक़ात की. मैंने उन्हें हाल ही में 95 साल का होने पर बधाई दी और मैंने उन्हें बताया कि यूपीए-वामदल के क़रार के टूटने के कारण क्या हैं." 22 जुलाई को विश्वास मत के दौरान यूपीए सरकार के बच पाने के सवाल पर प्रणब मुखर्जी ने कहा कि ये तो संसद में उसी दिन पता चलेगा. प्रणब मुखर्जी ने कहा कि ये उनका नैतिक कर्तव्य है कि हाल में जो राजनीतिक घटनाएँ हुई हैं उनसे ज्योति बसु के क़द के नेता को वाकिफ़ कराया जाए. "हम मानते हैं कि ज्योति बसु और हरकिशन सिंह सुरजीत की वजह से ही यूपीए और वामदलों का क़रार हुआ था. इसीलिए मैं समझता हूँ कि ये मेरा नैतिक कर्तव्य है कि मैं ज्योति बसु को बताऊँ कि गठबंधन सरकार क्यों नहीं चल सकी." इस बीच ज्योति बसु और लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी की भी रविवार को मुलाक़ात होनी है. दबाव में दादा लेकिन अपने पद से इस्तीफ़ा देने को लेकर लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी इन दिनों बेहद दबाव में हैं. वामदलों के संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद सीपीएम सांसद और लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी पर इस्तीफ़ा देने का दबाव बढ़ता जा रहा है. ऐसी ख़बरें हैं कि 22 जुलाई को संसद में होने वाले यूपीए सरकार के शक्ति परीक्षण से पहले सोमनाथ चटर्जी इस्तीफ़ा दे सकते हैं.
हालांकि, सीपीएम महासचिव प्रकाश करात ने शनिवार को कहा था कि सोमनाथ चटर्जी को लोकसभा अध्यक्ष के पद से इस्तीफ़ा देने के बारे में अब तक कुछ कहा नहीं गया है. करात ने कहा कि उन्हें अपना भविष्य खुद ही तय करना है और उन्हें पार्टी की तरफ़ से इस्तीफ़ा देने के लिए नहीं कहा गया है. प्रकाश करात ने कहा, "इस बारे में वो खुद ही कोई फ़ैसला करेंगे." सोमनाथ चटर्जी का नाम वामदलों के 60 सांसदों की उस सूची में शामिल है जो उन्होंने राष्ट्रपति को सौंपी है. पिछले सप्ताह परमाणु क़रार पर सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद जब सोमनाथ चटर्जी से ये पूछा गया था कि क्या वो अपने पद से इस्तीफ़ा देंगे तो उन्होंने कहा था कि वो सभी पार्टियों द्वारा मनोनीत हैं न कि सिर्फ़ वामदलों द्वारा. सोमनाथ चटर्जी ने कहा, " मैं लोकसभा अध्यक्ष हूँ, किसी राजनीतिक दल का नुमाइंदा नहीं हूँ और इस पद को किसी राजनीतिक खींचतान में नहीं घसीटना चाहिए." कांग्रेस की राय वैसे वामदलों की जगह अब यूपीए का समर्थन कर रही समाजवादी पार्टी पहले ही साफ़ कर चुकी है कि वो चाहती है कि सोमनाथ चटर्जी लोकसभा अध्यक्ष के पद पर ही काम करते रहें. कांग्रेस पहले ही कह चुकी है कि उसे सोमनाथ चटर्जी के लोकसभा अध्यक्ष के रूप में काम करने में कोई परेशानी नहीं है. कांग्रेन नेता वीरप्पा मोइला से जब इस बारे में पूछा गया था तो उनका कहा था, " ये एक संवैधानिक पद है और हम इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे." मोइली ने कहा था, "वामदल कोई हमारे दुश्मन नहीं हैं. हमने लोकसभा अध्यक्ष को बदलने के लिए कोई क़दम नहीं उठाया है और ऐसा हमारा कोई इरादा भी नहीं है." सोमनाथ चटर्जी 2004 में लोकसभा अध्यक्ष बने थे. |
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