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बात चल रही है, रिश्ता पक्का नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के साथ परमाणु सहयोग के मुद्दे पर गहराती राजनीतिक अनिश्चतता के बीच समाजवादी पार्टी ने सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को समर्थन देने के मामले पर कोई ठोस बात नहीं की. अमर सिंह से पूछा गया कि आज राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से हुई बातचीत से वे कितने संतुष्ट हैं तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, "सवाल ये है कि समाजवादी पार्टी अकेली नहीं है, हम यूएनपीए के साथ है, कल हम यूएनपीए की बैठक में अपनी बात कहेंगे, हम अपने गठबंधन के साझीदारों से पत्रकारों के माध्यम से बात करना उचित नहीं समझते". समाजवादी पार्टी की ओर से इतना ही कहा गया कि उनका मुख्य लक्ष्य "सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता में आने से रोकना है." अमर सिंह के संवाददाता सम्मेलन में मौजूद बीबीसी संवाददाता श्याम सुंदर का कहना है कि "बंद कमरों में जो बातें हुई हैं वो प्रेस कॉन्फ्रेंस में कभी नहीं बताई जातीं लेकिन ऐसा लग रहा है कि काँग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सहमति बन गई है कि अगर वामपंथी अविश्वास प्रस्ताव लाते हैं तो वे सरकार को बचा लेंगे". समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन से एक घंटे की मुलाक़ात के बाद कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चाहिए कि वे विवादास्पद मामलों पर स्थिति स्पष्ट करें. अमर सिंह ने इन सवालों का कोई सीधा जवाब नहीं दिया कि अगर वामपंथी पार्टियाँ केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेती हैं तो क्या वे सरकार को बचाने के लिए उसे समर्थन देने को तैयार हैं. समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह ने कहा कि यह सवाल अभी प्रासंगिक नहीं है क्योंकि वामपंथी पार्टियों ने समर्थन वापस नहीं लिया है इसलिए उसे बचाने का सवाल नहीं उठता. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ एक घंटे तक हुई बातचीत का उन्होंने कोई ब्योरा नहीं दिया, इससे पहले उन्होंने विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी से भी मुलाक़ात की थी. वामपंथी पार्टियों ने सरकार को धमकी दी थी कि अगर सरकार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) में जाती है तो वह समर्थन वापस ले लेगी. प्रतिक्रियाएँ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बीबीसी से बातचीत में इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि "अगर सरकार आईएईए में जाती है तो हम अपना समर्थन वापस लेने के रुख़ पर क़ायम हैं". भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि समाजवादी पार्टी अपनी 'संकीर्ण राजनीति' के आधार पर यूपीए को समर्थन देने की ओर बढ़ रही है. बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "यह दरअसल उत्तर प्रदेश की राजनीति है, समाजवादी पार्टी राज्य में मायावती से परेशान है. उनके ख़िलाफ़ कई मामले हैं, सीबीआई के मामले भी हैं. वे इन मामलों से बचने और मायावती से निबटने के लिए केंद्र सरकार को समर्थन देना चाहते हैं". रविशंकर प्रसाद कहते हैं, "आपको याद होगा कि समाजवादी पार्टी ने बुश की भारत यात्रा का कैसा कड़ा विरोध किया था, उनके रुख़ में इतने बड़े परिवर्तन की कुछ तो वजह होगी. यूपीए एक स्वार्थपरक गठबंधन है जिसमें लोग अपने स्वार्थ से आते और जाते रहते हैं". |
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