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करुणानिधि और वामपंथियों की बातचीत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) और वाम दलों के बीच गतिरोध बरक़रार है. इस बीच ख़बर है कि कांग्रेस और वामदल के बीच चले आ रहे गतिरोध को दूर करने के लिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके नेता एम करुणानिधि मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं. रविवार को करुणानिधि की मुलाक़ात सीपीएम के महासचिव प्रकाश करात और सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव डी राजा से हुई. शनिवार देर रात करुणानिधि ने चेन्नई में एक आम सभा के दौरान कहा, " देशहित में ये हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम कांग्रेस और वामदलों के बीच उभरे मतभेदों को दूर करें." करुणानिधि ने कहा कि वो इस गतिरोध को ख़त्म करने के लिए जल्द ही दिल्ली भी जाएँगे. करुणानिधि इस सप्ताह दिल्ली आ सकते हैं. करुणानिधि की पार्टी डीएमके, यूपीए का हिस्सा है और पिछले साल भी परमाणु क़रार मुद्दे पर जब कांग्रेस और वामदलों के बीच गतिरोध पैदा हुआ था तो करुणानिधि ने इसे हल करने में एक अहम भूमिका निभाई थी. पीटीआई के अनुसार शनिवार को सीपीआई नेता डी राजा ने फ़ोन पर करुणानिधि से बात की थी और परमाणु क़रार मसले पर अपनी पार्टी का रुख साफ़ किया था. डी राजा ने कहा, "मैंने करुणानिधि से फ़ोन पर बात की. मैंने उनसे कहा कि आख़िर सरकार परमाणु समझौता करने की इतनी इच्छुक क्यों है ? जबकि ऐसे कई मुद्दे हैं जिनका हल किया जाना अभी बाकी है." प्रधानमंत्री से मिले प्रणव इस बीच विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की.
प्रधानमंत्री और प्रणव मुखर्जी की ये मुलाक़ात तकरीबन 40 मिनट चली. प्रणव मुखर्जी परमाणु समझौते में भारत सरकार की तरफ़ से मुख्य मध्यस्थकर्ता हैं. हालाँकि, प्रणव मुखर्जी ने प्रधानमंत्री से मिलने के बाद संवाददाताओं से कोई बात नहीं की. एक बार फिर परमाणु समझौता मुद्दा गरमाने के बाद प्रणव मुखर्जी और रक्षा मंत्री एके एंटनी ने पिछले कुछ दिनों में यूपीए और वामदलों के नेताओं से मुलाक़ात की है. इससे पहले शुक्रवार को प्रणव मुखर्जी और एके एंटनी ने क़रीब दो घंटे तक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से बात की थी. शुक्रवार को सोनिया गांधी के साथ हुई इस बैठक के बाद मुखर्जी ने कहा था, " हालात जस की तस हैं. न तो किसी तरह का कोई सुधार हुआ है और न कोई बात बिगड़ी है." केंद्र सरकार परमाणु समझौते के मुद्दे पर वामदलों के साथ गर्म हुए हालात को किसी भी तरह से सामान्य करना चाहती है. लेकिन हालात काबू में आते नज़र नहीं आ रहे हैं. यूपीए के सहयोगी दल आरजेडी, डीएमके और लोक जनशाक्ति पार्टी परमाणु समझौते पर सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं. इन दलों का कहना है कि ये समझौता देशहित में है. हालाँकि, इन दलों का कहना है कि सरकार को इस पर वामदलों का रुख़ भी जानना चाहिए. वामदल पहले ही साफ़ कर चुके हैं कि अगर सरकार समझौते पर अपने क़दम आगे बढ़ाती है तो वो सरकार के ख़िलाफ़ अपना मत देंगे. शुक्रवार को प्रणव मुखर्जी ने प्रकाश करात और डी राजा से मुलाकात की थी. | इससे जुड़ी ख़बरें परमाणु गतिरोध पर मुलाक़ातों का दौर20 जून, 2008 | भारत और पड़ोस परमाणु करार पर संकट बरकरार20 जून, 2008 | भारत और पड़ोस यूपीए-वाम दलों की बैठक 28 को फिर06 मई, 2008 | भारत और पड़ोस यूपीए-वाम बैठक अब 25 जून को18 जून, 2008 | भारत और पड़ोस यूपीए समन्वय समिति से हटी आरएसपी02 जून, 2008 | भारत और पड़ोस समझौते पर यूपीए-वामदलों की बैठक टली27 मई, 2008 | भारत और पड़ोस समझौते पर यूपीए-वाम दलों की बैठक06 मई, 2008 | भारत और पड़ोस 'परमाणु समझौता जल्दी हो तो अच्छा'06 मई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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