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शुक्रवार, 20 जून, 2008 को 10:08 GMT तक के समाचार
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परमाणु गतिरोध पर मुलाक़ातों का दौर

यूपीए
मुखर्जी कई दलों के नेताओं से वार्ता में जुटे हैं
भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन और वाम दलों के बीच उभरे मतभेद से राजनीति गरमाई हुई है.

विभिन्न दलों और नेताओं की बैठकों का दौर जारी है और सरकार कितनी देर और चलेगी, इस बारे में अटकलों का बाज़ार भी गर्म है.

सीपीएम महासचिव प्रकाश कारत ने शुक्रवार शाम समाजवादी पार्टी नेता रामगोपाल यादव से मुलाक़ात की.

उनका समाजवादी पार्टी नेता से मिलना इस संदर्भ मे महत्वपूर्ण है कि ये चर्चा है की भारत अमरीका परमाणु समझौते पर अगर वामपंथी पार्टियाँ सरकार से समर्थन वापस लेती हैं तो समाजवादी पार्टी सरकार का समर्थन कर सकती है.

हालांकि औपचारिक तौर पर रामगोपाल यादव या प्रकाश कारत ने कुछ नहीं कहा पर बैठक की जानकारी रखनेवाले सीपीएम के एक वरिष्ठ नेता का कहना था कि समाजवादी पार्टी को यही समझाने की कोशिश की गई है कि इस मुद्दे पर सरकार गिरने का सीधा फ़ायदा भारतीय जनता पार्टी को होगा.

इससे पहले प्रकाश कारत ने सुबह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार से भी मुलाक़ात की.

शरद पवार ने प्रकाश कारत से मुलाक़ात से बाद प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह से बात की.

लेकिन दिन के अंत में वामपंथी पार्टियों का मानना था कि संकट अभी टला नही है.

इधर पिछले दो दिनों के प्रयास का फल ये है कि कांग्रेस ने फ़िलहाल इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से वामदलों पर निशाना न साधने का फ़ैसला किया है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले तीन–चार दिन यूपीए सरकार के लिए काफ़ी अहम हैं.

 एक समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ख़ुद कहा था कि यूपीए सरकार सिर्फ़ एक मुद्दे वाली सरकार नहीं है
सीपीएम महासचिव, प्रकाश कारत

इसका अर्थ ये है कि भारत अमरीका परमाणु समझौते पर अब बात आरपार की होगी और अब सरकार की ओर से वामपंथी पार्टियों से विचार विमर्श के नाम पर समय हासिल करने की बजाए, मामले को तय करने का दबाव है.

उनकी राय में इस मुद्दे पर वामपंथी पार्टियों की तरह ही सरकार के लिए भी अब पीछे हटना मुश्किल होगा.

इसी स्थिति को भांपते हुए वामदलों की पूरी कोशिश है कि यूपीए के सहयोगी दलों के जरिए सरकार पर दबाव बनाया जाए.

'मामला आर-पार का'

दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी कह चुकी है कि अमरीका के साथ परमाणु समझौते पर कोई भी फ़ैसला सत्ताधारी गठबंधन की पार्टियों को मिलकर लेना होगा.

उधर वाम दलों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में अंतिम चरण की वार्ता के लिए जाती है तो वाम दल सरकार को बाहर से समर्थन देने के बारे में पुनर्विचार कर सकते हैं.

सीपीएम के महासचिव प्रकाश कारत ने दिल्ली में गुरुवार को कहा, "एक समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ख़ुद कहा था कि यूपीए सरकार सिर्फ़ एक मुद्दे वाली सरकार नहीं है."

लालू प्रसाद भी समझौते के पक्ष में आए

उनका इशारा साफ़ था की सरकार को भारत-अमरीका असैनिक परमाणु समझौते के अलावा दूसरे मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहिए.

पिछले कुछ दिनों में परमाणु समझौते पर गतिविधियाँ ख़ासी तेज़ रही हैं.

सीपीएम महासचिव प्रकाश कारत के एक निकट सहयोगी और इस मुद्दे पर सरकार और वामदलों के बीच चली बहस में अहम् भूमिका निभाने वाले एक नेता का कहना था कि इस बार मामला 'आर-पार' तक पहुँच गया है.

उनके अनुसार वामपंथी पार्टियों के लिए अब पीछे हटना लगभग असंभव है. दूसरी ओर सरकार की परमाणु समझौते पर आगे बढने की धमकी भी खोखली नहीं है.

हालाँकि, सीपीएम की पश्चिम बंगाल की इकाई ने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को राय दी है कि जितना संभव हो सके चुनाव टालने की कोशिश की जाए.

इसी दबाव में सीपीएम के नेता अब यूपीए के घटक दलों के ज़रिए दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं.

'समझौता देश के हित में'

यूपीए सरकार के वरिष्ठ मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भी गुरुवार को सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी से बातचीत की है. मुखर्जी इससे पहले यूपीए के घटक दलों से भी मिले थे.

कांग्रेस पार्टी का कहना है कि परमाणु समझौते पर पार्टी का रुख़ स्पष्ट है. पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा, "कांग्रेस का मानना है कि परमाणु समझौता देश हित में है और इससे देश में बिजली संकट कम हो सकता है."

कारत
कारत ने केंद्रीय मंत्री शरद पवार से बातचीत की

इस बीच यूपीए में शामिल राष्ट्रीय जनता दल और द्रविड़ मुनेत्र कषगम यानी डीएमके ने परमाणु समझौते की पैरवी की है.

राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख और केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद ने कहा है कि परमाणु समझौते देश के हित में है और इस विषय पर आईएईए में जाना कोई गुनाह नहीं है.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी भी लालू प्रसाद से इस बारे में मिल चुके हैं. इस मुलाक़ात के बाद लालू प्रसाद ने कहा था कि सरकार को गठबंधन में शामिल दलों को साथ लेकर चलना चाहिए.

यूपीए गठबंधन में शामिल द्रमुक ने भी परमाणु समझौते का समर्थन किया है. पार्टी प्रवक्ता टीकेएस इलैंगोवन ने कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी कांग्रेस के साथ है.

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