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'समझौते पर वामदलों की सहमति ज़रूरी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि परमाणु समझौते पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा प्राधिकरण (आईएईए) के साथ सुरक्षा मापदंडों पर बातचीत पूरी हो गई है. भारत और अमरीका के बीच परमाणु समझौते की यह एक प्रमुख शर्त थी. विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) और वामदलों के समन्वय समिति की बैठक होगी, जिसमें आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा. प्रणव मुखर्जी ने पत्रकारों ने बताया, "पिछले साल नवंबर में ही यह तय हुआ था कि हम परमाणु समझौते के सुरक्षा मापदंडों के लिए आईएईए से विचार विमर्श करेंगे. अब आईएईए के साथ बातचीत पूरी हो गई है." परमाणु समझौते पर वामपंथी दलों की ओर से आ रहे कड़े बयानों पर टिप्पणी करते हुए प्रणव मुखर्जी ने कहा कि वामदलों के साथ बैठक में इसके बारे में उन्हें जानकारी दी जाएगी. उन्होंने इससे इनकार किया कि वामदलों के बयान के बाद जल्द ही लोकसभा चुनाव होंगे. प्रणव मुखर्जी ने कहा कि गठबंधन में शामिल कोई भी पार्टी चुनाव नहीं चाहती. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि उन्हें भरोसे में लिए बिना इस मामले में कुछ भी किया गया, तो सरकार से समर्थन वापस लिया जा सकता है. जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने पत्र लिखकर इस मामले पर यथाशीघ्र बैठक बुलाने की मांग की थी. दरअसल संसद का बजट सत्र शुरू होते ही इस मामले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बयान दिया था. मांग इसके बाद से ही वामपंथी पार्टियाँ बैठक बुलाने की मांग कर रही हैं. भाकपा नेता एबी बर्धन ने तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर कहा है कि अगर सरकार परमाणु समझौते को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ती है तो उनके पास समर्थन वापसी के अलावा कोई चारा नहीं है.
बर्धन ने कहा कि केवल परमाणु मुद्दा ही नहीं बल्कि कई अन्य मुद्दों पर साझा न्यूनतम कार्यक्रम का उल्लंघन भी चिंता का विषय है. दूसरी ओर माकपा महासचिव प्रकाश कारत ने प्रणव मुखर्जी को पत्र लिखकर मांग की कि समन्वय समिति की बैठक जल्द ही बुलाई जाए. अमरीका के इस बयान के बाद कि 123 समझौता मई तक अमरीकी कांग्रेस के पास भेजा जाना है, वामपंथी दल इस पर जल्दी से जल्दी विचार विमर्श करना चाहते हैं. वैसे केंद्र सरकार को मार्च के अंत तक अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा प्राधिकरण के साथ समझौते को पूरा करना था. ताकि वह परमाणु ईंधन की आपूर्ति करने वाले न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप के पास छूट के लिए जा सके. अब प्रणव मुखर्जी ने इसकी पुष्टि कर दी है कि आईएईए के साथ बातचीत पूरी हो गई है और वे इस बारे में अंतिम फ़ैसला करने से पहले वामदलों के साथ विचार-विमर्श करेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें बर्धन ने पत्र लिखकर चेतावनी दी07 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस वाम दलों ने बैठक बुलाने की मांग की06 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस प्रधानमंत्री की 'भीष्म पितामह' से अपील05 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस 'परमाणु समझौते पर सहमति की कोशिश'03 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस परमाणु समझौते पर गेट्स आशावान27 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस राबर्ट गेट्स भारत यात्रा पर26 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस प्रणव ने परमाणु समझौते पर चेताया04 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'परमाणु समझौते पर आगे नहीं बढ़ने देंगे'22 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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