|
'परमाणु समझौते पर आगे नहीं बढ़ने देंगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से बातचीत का नतीजा जो भी आए, वह सरकार को अमरीका से परमाणु समझौते पर फ़िलहाल आगे नहीं बढ़ने देगी. पार्टी पोलित ब्यूरो के सदस्य और मज़दूर संगठन सीटू के महासचिव एमके पंधे ने इन बातों को ख़ारिज कर दिया कि परमाणु समझौते पर सीपीएम के रुख़ में कोई बदलाव आया है. वामदल इससे पहले इस बात के लिए तैयार हो गए थे कि सरकार आईएईए से बातचीत करे लेकिन उसके साथ कोई समझौता नहीं करे. सहमति इस बात पर बनी थी कि आईएईए से बातचीत के बाद सरकार समन्वय समिति को बातचीत के नतीजों से अवगत कराएगी और समिति के फ़ैसले के आधार पर अगला क़दम उठाएगी. शनिवार को पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक के बाद पंधे ने पत्रकारों से कहा, "परमाणु समझौते पर हमारा रुख़ बिल्कुल साफ़ है. हम इसे किसी भी हालत में क्रियान्वित नहीं होंने देंगे." उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी से सरकार की बातचीत का जो भी नतीजा आए, हम उसे इस समझौते पर आगे बढ़ने की मंज़ूरी नहीं देंगे." पंधे ने यह भी कहा कि इसका जो भी नतीजा निकलेगा, हम उसका सामना करेंगे. वहीं पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी ने परमाणु समझौते पर कहा है कि समन्वय समिति में सरकार की रिपोर्ट के बाद ही कोई फ़ैसला लिया जा सकेगा. येचुरी ने कहा, "सरकार ने कहा है कि आईएईए से बातचीत के बाद वह बिना दस्तख़त किए समिति के पास आएगी." उनका कहना था, "समिति के सामने सरकार जो रिपोर्ट रखेगी उसके आधार पर ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी." लेकिन येचुरी ने फिर दोहराया कि इस समझौते में कई ऐसे प्रावधान हैं जो देशहित में नहीं हैं. राजनीतिक प्रस्ताव सीपीएम की केंद्रीय समिति ने अगले साल होने वाली पार्टी काँग्रेस के राजनीतिक प्रस्ताव के मसौदे को शनिवार की बैठक में अंतिम रूप दिया.
येचुरी ने कहा कि सरकार के प्रदर्शन पर पार्टी की राय जैसे सवालों के पूरे जवाब राजनीतिक प्रस्ताव के पारित होने के बाद ही मिल पाएँगे. उनका कहना था कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत कई मामले हैं जो अधूरे हैं और उनको पूरा करने के लिए दबाव बनाया जाएगा. येचुरी ने कहा कि सरकार ने पाँच सालों में शिक्षा पर ख़र्च को बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद के छह फ़ीसदी तक ले जाने का वादा किया था लेकिन यह अधूरा है. येचुरी के मुताबिक सीपीएम के सामने साँप्रदायिकता और साम्राज्यवाद दोनों बराबर महत्व की चुनौती हैं और इनमें से जिसके ख़िलाफ़ नहीं लड़ेंगे, वही बड़ा ख़तरा बन जाएगा. येचुरी मानते हैं कि सांप्रदायिक ताक़तों को सत्ता से दूर रखने का वामपंथी लक्ष्य पूरा हुआ है लेकिन उनसे निबटने के लिए यूपीए की ओर से और ज़्यादा प्रयास की ज़रूरत है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||