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प्रधानमंत्री की 'भीष्म पितामह' से अपील | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के साथ परमाणु समझौते पर वामपंथी दलों के कड़े विरोध के बाद अब कांग्रेस इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी से सहयोग चाहती है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भाजपा नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को 'राजनीति का भीष्म पितामह' बताते हुए अपील की कि वो इसके समर्थन में आगे आएं. राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्तात पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने परमाणु करार के विरोध को 'संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ' बताते हुए 'राजनीति के भीष्म पितामह' अटलबिहारी वाजपेयी से इस समझौते के बारे में अंतरआत्मा की आवाज़ सुनने की गुहार लगाई. मनमोहन सिंह ने अमरीका के पूर्व विदेश उपमंत्री स्ट्रोब टालबोट के एक इंटरव्यू के हवाले से कहा कि भाजपा नेता और पूर्व विदेशमंत्री जसवंत सिंह तो अमरीका के साथ मौजूदा समझौते से बहुत कमतर समझौता करने को तैयार थे. वामपंथी दलों के सदस्यों ने तो इस पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की लेकिन इससे भाजपा सदस्य उखड़ गए. प्रधानमंत्री ने लोक सभा और राज्यसभा में जवाब देते हुए कहा कि परमाणु समझौते पर आम सहमति बनाने की प्रक्रिया जारी है. आडवाणी पर निशाना लोक सभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी पर कई बार निशाना साधा. प्रधानमंत्री का कहना था कि किसानों की परेशानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) शासन की विरासत है. पिछली सरकार में किसानों को सही दाम नहीं दिया गया. चरमपंथ से निपटने के लिए पोटा जैसे क़ानून की मांग को ठुकराते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि यदि ऐसे क़ानून से ही दहशतगर्दी रोकी जा सकती तो एनडीए के कार्यकाल के दौरान कोई घटना नहीं होती. उनका कहना था कि सरकार दृढ़ है और उसी दृढ़ता से चरमपंथ का सामना किया जाएगा. मनमोहन सिंह का कहना था कि विपक्षी नेता कहते रहे हैं कि सरकार अब गई तब गई, लेकिन देश के सौभाग्य से हमारी सरकार अब भी कायम है. उन्होंने विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी की ओर इशारा कर कहा,'' न खंजर उठेगा न तलवार चलेगी, ये बाजू मेरे आजमाए हुए हैं.'' विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने प्रधानमंत्री के बयान से असहमति जताई और विरोध स्वरूप पूरी भाजपा ने लोक सभा से बहिर्गमन किया. |
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