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'भारत पर दबाव नहीं डाला जा सकता' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत दौरे पर आए अमरीका के पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर का कहना है कि आज दुनिया के विभिन हिस्सों में अलग-अलग क्रांतियों के चलते अंतरराष्ट्रीय राजनीति में परिवर्तन आ रहा है. उनका कहना है कि जिस तरह परिवर्तन हो रहे हैं उससे यह ज़रूरी हो गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय मिलकर इस बदलाव को समझे और समस्याओं का समाधान निकाले. दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में अमरीका और भारत के कई मौजूदा और पूर्व राजनयिकों सहित भारत में तैनात विभिन्न देशों के राजदूत उपस्थित थे. कार्यक्रम में किसिंजर ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पिछले 200 वर्षों में आए बदलाव को एक अलग अंदाज़ में पेश किया. आधे घंटे के अपने भाषण में किसिंजर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ऐसा बदलाव हो रहा है कि यूरोपीय प्रणाली पर आधारित देश अब या तो बदल रहे हैं या उनके स्वरूप में बदलाव आ रहा है. बदलती दुनिया किसिंजर के अनुसार अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमरीका से हटकर और एशिया का बढ़ता महत्व- ख़ास तौर पर भारत और चीन का बढ़ता महत्व, इस बात को दर्शाता है की सदियों पुरानी राजनीति में मूलभूत बदलाव आ रहा है. इस संदर्भ में हर देश के पास परमाणु तकनीक होने का अंतरराष्ट्रीय शांति पर प्रभाव पड़ेगा. किसिंजर ने कहा कि शीत युद्ध के समय दुनिया को परमाणु युद्ध से इसलिए बचाया जा सका क्योंकि केवल अमरीका और रूस के पास ही परमाणु हथियार थे. लेकिन आज जब इरान परमाणु तकनीकी अपनाने की बात करता है तो यह ज़रूरी है की उस पर रोक लगाई जाए. लेकिन कैसे? इसका किसी देश के पास जवाब नहीं है. किसिंजर ने कहा की उनके अनुसार अमरीका को इरान से बातचीत कर इस समस्या का हल निकलना चाहिए. परमाणु समझौता कार्यक्रम में उपस्थित लोग भारत-अमरीका रिश्तों खासकर परमाणु संधि पर किसिंजर की टिपण्णी का उत्सुकता से इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन उन्होंने साफ किया कि वह परमाणु समझौते पर दबाव डालने के लिए भारत नहीं आए हैं. उनहोंने कहा कि वह भारतीय सोच को समझने भारत आए हैं. उन्होंने कहा कि भारत-अमरीका का रिश्ता परमाणु समझौते पर निर्भर नहीं है. न ही चीन की बढ़ती ताक़त पर नियंत्रण पाने के लिए अमरीका भारत से रिश्ते बढ़ा रहा है. किसिंजर का कहना था की भारत और चीन के साथ बेहतर रिश्ते बनाने के लिए अमरीका को एक देश का सहारा लेने की ज़रूरत नहीं है. किसिंजर ने कहा कि दोनों देश कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक राय रखते हैं इसलिए एक-दूसरे से सहयोग बढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा, "हमे एक मुद्दे के हर पहलू पर एक राय रखने कि ज़रूरत नहीं है." किसिंजर ने कहा, भारत को समझौता अपने हितों के लिए करना है. "यह भारत को तय करना होगा. उस पर कोई दबाव नहीं डाल सकता". | इससे जुड़ी ख़बरें किसिंजर ने अध्यक्षता छोड़ी14 दिसंबरजनवरी, 2002 | पहला पन्ना समझौते को अमरीकी संसद की मंज़ूरी09 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना बात आगे बढ़ी लेकिन समझौता अभी दूर20 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना 'परमाणु परीक्षण किए तो समझौता रद्द'15 अगस्त, 2007 | पहला पन्ना 'समझौता जल्दी लागू करना चाहिए'28 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना 'परमाणु समझौता आगे बढ़ाना चाहिए'30 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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