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जो बीत चुका, उसे पीछे छोड़ें: मनमोहन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि भारत पाकिस्तान के साथ शांति के साथ रहना चाहता है और जो बीत चुका है उसे पीछे छोड़ देना चाहिए. लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के नए नेतृत्व को भरोसा दिलाया कि भारत पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध चाहता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष स्थायी शांति कायम करने के लिए काम करेंगे. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "भारत पाकिस्तान के साथ शांति के साथ रहना चाहता है. दोनो देशों के भाग्य एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. ज़रूरत है कि जो बीत चुका है हम उसे पीछे छोड़ दें." उन्होंने कहा, "हमें दोनों देशों के भविष्य, सुरक्षा और समृद्धि के बारे में सोचने की ज़रूरत है." महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की शांति वार्ता शुरु करने की पहल को साहसी क़दम बताया. उन्होंने उम्मीद जताई कि 'पाकिस्तान का नया चुना हुआ नेतृत्व भारत के साथ जल्द ही स्थायी शांति कायम करने की दिशा में आगे बढ़ेगा.' ऋण माफ़ी की सराहना राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कृषि क्षेत्र की भी विस्तृत चर्चा की है. प्रधानमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी पर तीख़े प्रहार करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने किसानों पर जो बोझ डाल रखा था उसे उनकी सरकार ने समाप्त किया है. उन्होंने कहा, "हम विपक्ष को याद दिलाना चाहते हैं कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने किसानों पर जो बोझ डाल रखा था हमने सिर्फ़ उसे समाप्त किया है." किसानों की कर्ज़ माफ़ी की पहल को ऐतिहासिक करार देते हुए प्रधानमंत्री ने विपक्ष की इस बारे में आपत्तियों को ख़ारिज किया. अपने भाषण में आगे उन्होंने कहा कि किसानों की बदहाली ही संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) को केंद्र में लेकर आया. राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, "सभी किसानों की आँखों से आंसू पोंछकर ही हम दम लेंगे." |
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