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'संकीर्ण राजनीति विकास में बाधक' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि किसी क्षेत्र या ख़ास वर्ग पर आधारित संकुचित राजनीति राष्ट्रीय विकास में बाधक बन सकती है. संघीय शासन प्रणाली पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सलाह दी कि 'स्थानीय हित राष्ट्रीय सोच के आड़े नहीं आना चाहिए.' उनका कहना था, "कभी-कभी किसी समस्या का निदान बेहद राजनीतिक रंग अख़्तियार कर लेता है. क्षेत्रीयता, ख़ास विचारधारा या किसी ख़ास वर्ग पर आधारित संकुचित राजनीतिक सोच राष्ट्रीय दृष्टि और सामूहिक उद्देश्यों में बाधक बन सकती है." उन्होंने सवालिया लहज़े में कहा कि क्या एकदलीय व्यवस्था केंद्र-राज्य संबंधों के प्रबंधन में बहुदलीय प्रणाली से ज़्यादा कारगर है. प्रधानमंत्री का कहना था, "राष्ट्रीय पार्टियों के दबदबे वाली बहुदलीय व्यवस्था से क्या कोई उम्मीद कर सकता है कि सभी मिल कर नीतिगत मुद्दों पर राष्ट्रीय दृष्टि विकसित कर सकेंगे और संघीय एकता को मज़बूती प्रदान कर सकेंगे." केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों के कारगर प्रबंधन को ज़रूरी बताते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत के अनुभवों से संकेत मिलता है कि दोनों के बीच रिश्ते कभी कभार 'गंभीर तनाव' खड़े कर सकते हैं. प्रधानमंत्री ने नदियों के जल बँटवारे, प्राकृतिक संसाधनों के वितरण और वित्तीय संबंधों के प्रबंधन में होने वाली चुनौतियों और दबाव की राजनीति का भी ज़िक्र किया. | इससे जुड़ी ख़बरें 'इस्तीफ़ा माँगने का हक़ नहीं भाजपा को'18 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'परमाणु समझौता लागू करने में परेशानी'15 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'मनमोहन सिंह सबसे कमज़ोर प्रधानमंत्री'13 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का ऑपरेशन16 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु ऊर्जा देश के लिए ज़रूरी:मनमोहन20 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस 'देश का अच्छा समय आना अभी बाक़ी'15 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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