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बर्धन ने पत्र लिखकर चेतावनी दी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर सरकार की सक्रियता की तीख़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि यदि वह समझौता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ती है तो उसके पास समर्थन वापस के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव एबी बर्धन ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर कहा है कि हाल में कुछ बयानों से उनकी पार्टी ख़ासी चिंतित है. इसके साथ उनका ये भी कहना है कि केवल परमाणु मुद्दा ही नहीं बल्कि कई अन्य मुद्दों पर साझा न्यूनतम कार्यक्रम का उल्लंघन भी चिंता का विषय है. उनका कहना है कि अमरीकी अधिकारियों, विशेष तौर पर अमरीकी सहायक विदेश उप मंत्री रिचर्ड बाउचर के भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर बयान चौंकाने वाला है. बर्धन ने अपनी पत्र में ख़ास तौर पर बाउचर के उस बयान का ज़िक्र किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि समझौते के आख़िरी दौर में 'अमरीका को इस बात से फ़र्क नहीं पड़ेगा कि भारत में सरकार के पास बहुमत है या फिर वह अल्पसंख्यक, कार्यवाहक सरकार है.' 'भाजपा का समर्थन माँगने का प्रयास' सीपीआई के महासचिव ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आगे लिखा है कि चौंकाने वाली बात ऐसे बयानों को सरकार की ओर से कोई चुनौती नहीं दी जाती. उन्होंने ये भी लिखा है - "प्रधानमंत्री जी अपने भाषण में आपका अटल बिहारी वाजपेयी को भारतीय राजनीति का 'भीष्म पितामह' कहना और उनसे संकीर्ण राजनीतिक हितों से ऊपर उठने की अपील करना, इस समझौते के लिए भाजपा का समर्थन माँगने का स्पष्ट प्रयास है." बर्धन का कहना है कि जब संसद में बहस से ही साफ़ हो गया है कि इस मुद्दे पर कोई आम राय संभव नहीं है तो प्रधानमंत्री की आम राय बनाने की बात खोखली है. उन्होंने आगे अपने पत्र में ये भी लिखा है कि यूपीए-वाम समन्वय समिति ने पिछली बैठक में फ़ैसला किया था कि सरकार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ बातचीत के बाद वापस समिति से चर्चा करेगी. सीपीआई महासचिव का कहना है कि इस फ़ैसले को पूरी तरह से नजरअंजदाज़ किया जा रहा है जबकि वामदल सब्र के साथ इंतज़ार कर रहे हैं कि सरकार स्थिति स्पष्ट करे. |
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