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परमाणु समझौते के समर्थन में पत्र | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर संसद में संभावित बहस से पहले कई शीर्ष वैज्ञानिकों और पूर्व सेनाध्यक्षों ने सांसदों को खुला पत्र लिखकर कहा है यह समझौता अच्छा है. इस खुले पत्र में सांसदों से समझौते का समर्थन करने का अनुरोध करते हुए कहा गया है इससे देश के परमाणु कार्यक्रम की रुकावटें दूर होंगीं. 23 लोगों के हस्ताक्षरों के साथ भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि इस समझौते से भारत के परमाणु परीक्षण का और परमाणु हथियार बनाने का अधिकार नहीं छीनने जा रहा है. दो पृष्ठों के इस पत्र में यह भी बताया गया है कि यदि भारत को रूस से परमाणु संयंत्र लेना है तो भी उसके लिए अमरीका के साथ परमाणु समझौता करना ज़रुरी होगा. परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व चेयरमैन एमआर श्रीनिवासन, इसरो के पूर्व प्रमुख कस्तूरीरंगन, पूर्व वायुसेनाध्यक्ष अर्जुन सिंह और ओपी मेहता, पूर्व थलसेनाध्यक्ष वीएन शर्मा और वीपी मलिक और पूर्व नौसेनाध्यक्ष राम तहिल्यानी और माधवेंद्र सिंह इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख लोगों में से हैं. इस पत्र पर कुछ पूर्व राजनयिकों ने भी हस्ताक्षर किए हैं जिसमें पूर्व कैबिनेट सचिव बीजी देशमुख और नरेश चंद्रा, पूर्व विदेश सचिव केएस वाजपेयी, के रघुनाथ और ललित मानसिंह प्रमुख हैं. अपील संसद में परमाणु मसले पर चर्चा से पहले लिखे गए इस पत्र में सांसदों से अपील की गई है कि वे इस बात को ध्यान में रखें कि भारत विकासशील है और एक ताक़तवर देश है. इस पत्र में लिखा गया है, "यह दावा कोई नहीं कर सकता कि यह समझौता परिपूर्ण है या इससे वह सब हासिल होने वाला है जो हम पाना चाहते थे लेकिन जब आप एक अंतरराष्ट्रीय समझौता करते हैं तो अपनी पसंद के आसपास की ही कोई चीज़ हासिल करना चाहते हैं." इस पत्र में समझौते से होने वाले फ़ायदों की जानकारी दी गई है. साथ में एक चेतावनी भी दी गई है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत सी ताक़तें भारत की स्थिति को कमज़ोर कर सकती हैं जिसमें व्यापक परमाणु परीक्षण निषेध संधि (सीटीबीटी) पर हस्ताक्षर का दबाव शामिल है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'आईएईए के साथ चर्चा पर हरी झंडी'13 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु समझौते पर संसद में चर्चा होगी10 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु समझौते पर पुनर्विचार की माँग07 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'कार्यकाल पूरा न होने का कारण नहीं'31 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'परमाणु एजेंसी के साथ चर्चा पर हरी झंडी'22 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'सार्थक सहमति बनाने की कोशिशें जारी'17 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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