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'आईएईए के साथ चर्चा पर हरी झंडी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मनमोहन सिंह सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वाम दल भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर सरकार की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ चर्चा को एक हद तक आगे बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं. इससे पहले वाम दलों ने सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि सरकार आईएईए के साथ भारत के लिए विशेष समझौते पर चर्चा शुरु करती है तो वे सरकार से समर्थन वापस ले सकते हैं. वाम दलों में उच्चस्तरीय सूत्रों ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा है कि केंद्र सरकार आईएईए के साथ प्रस्तावित समझौते के मसौदे पर चर्चा शुरु कर सकती है. लेकिन साथ ही उनका ये भी कहना है कि यदि ऐसा होता है यानी सरकार आईएईए से चर्चा शुरु करती है तो बातचीत का जो भी परिणाम होगा उसे वाम दलों के सामने रखा जाएगा और फिर ही अंतिम फ़ैसला लिया जाएगा. वाम दलों में सूत्रों का कहना है कि इसका मतलब ये कतई नही है कि सरकार भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर वाम दलों की चिंताओं और आपत्तियों को दूर करने मे क़ामयाब हो गई है. आईएईए से समझौता ज़रूरी यूपीए और वाम दलों के बीच इस मुद्दे पर बनी समिति के अध्यक्ष विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी से जब यूपीए और वाम दलों के बीच बनी इस अनौपचारिक सहमति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसकी संभावना से इनकार नहीं किया. उनका कहना था, "यूपीए और वाम दलों की 16 नवंबर की बैठक, जो स्थगित कर दी गई थी, अब उसी दिन होगी. मुझे उम्मीद है कि इससे सकारात्मक नतीजा निकलेगा." भारत-अमरीका परमाणु सहमति को आगे बढ़ाने के लिए भारत सरकार को आईएईए के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करना ज़रूरी है और वाम दलों को चिंता है कि यदि इस पर हस्ताक्षर होते हैं तो समझौता अंतिम चरण में पहुँच जाएगा. सरकार ने इससे पहले भी वाम दलों के सामने एक प्रस्ताव रखा था कि परमाणु समझौते पर अंतराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी के साथ एक मसौदे पर चर्चा शुरु की जा सकती है. तो क्या इसे वामपंथी दलों के रवैए में आए कुछ बदलाव का संकेत माना जा सकता. टीकाकारों का कहना है कि संकेत ऐसे हैं कि भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर सरकार को अपनी साख बचाने का मौक़ा दिया जा रहा है. वाम दल मानते हैं कि अतंरराष्ट्रीय परामाणु उर्जा एजेंसी के साथ चर्चा पर सैद्धांतिक तौर पर उन्हें एतराज़ नहीं, लेकिन यदि सरकार को अंतिम समझौता करने की अनुमति मिलती है तो समझौते को लागू होने से रोकना अंसभव होगा और ये उन्हें स्वीकार्य नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें परमाणु समझौते पर बैठक फिर बेनतीजा09 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बयानों में नरमी से वामपंथी उत्साहित12 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'यूपीए सरकार को कोई ख़तरा नहीं'12 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'समझौते पर 2008 तक अमल हो जाए'16 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'सार्थक सहमति बनाने की कोशिशें जारी'17 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस निजीकरण, आरक्षण के मुद्दों पर हड़ताल19 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु समझौते पर समिति गठित04 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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