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रविवार, 19 नवंबर, 2006 को 18:44 GMT तक के समाचार
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निजीकरण, आरक्षण के मुद्दों पर हड़ताल

निजीकरण के ख़िलाफ़ और निजी क्षेत्र में आरक्षण के पक्ष में हड़ताल का आहवान किया गया है
भारत के वामपंथी दलों से जुड़े श्रम संगठन 14 दिसंबर को केंद्र सरकार की निजीकरण की नीतियों के ख़िलाफ़ और निजी क्षेत्र में आरक्षण के पक्ष में पूरे देश में हड़ताल करेंगे.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के श्रम संगठन सीटू के अध्यक्ष एमके पाँधे ने बीबीसी हिंदी के विशेष कार्यक्रम 'आपकी बात, बीबीसी के साथ' में श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए ये जानकारी दी है.

उनका कहना था, "सभी प्रमुख श्रम संगठनों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, बीमा कंपनियों, केंद्र और राज्य सरकारों के दफ़्तरों सहित रक्षा, कोयला और स्टील क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों और मज़दूरों से इस हड़ताल में भाग लेने का आहवान किया है."

उन्होंने आरोप लगाया, "यूपीए सरकार पिछले चुनावों में मज़दूर वर्ग से किए गए वादों को पूरा करने में अब तक असफल रही है. अव्यवस्थित क्षेत्र और कृषि क्षेत्र के मज़दूरों के लिए कोई विधेयक भी नहीं लाया गया."

सीपीएम के पोलितब्यूरो के सदस्य पाँधे ने कहा, "यूपीए सरकार रिटेल क्षेत्र में पूरी तरह विदेशी पूँजी निवेश को इजाज़त देने के पथ पर आगे बढ़ रही है और श्रम संगठन ऐसी उदारीकरण की नीतियों के चलते मूक दर्शक बने नहीं रह सकते. हम सरकार का ध्यान मज़दूरों के अधिकारों और महँगाई के मुद्दों की ओर आकर्षित करना चाहते हैं."

 यूपीए सरकार रिटेल क्षेत्र में पूरी तरह विदेशी पूँजी निवेश को इजाज़त देने के पथ पर आगे बढ़ रही है. हम सरकार का ध्यान मज़दूरों के अधिकारों और महँगाई के मुद्दों की ओर आकर्षित करना चाहते हैं
सीपीएम पोलितब्यूरों के सदस्य पाँधे

निजि क्षेत्र में आरक्षण

उनका कहना था, "निजी क्षेत्र में कमज़ोर वर्ग के लिए आरक्षण प्रदान करने के लिए, कांग्रेस पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र में इसके स्पष्ट ज़िक्र के बावजूद कोई विधेयक नहीं लाया गया है."

औद्योगिक समूहों की आरक्षण के मुद्दे पर कड़ी आलोचना करते हुए पाँधे का कहना था, "वे कहते हैं कि वे इस विषय में स्वैच्छिक कार्रवाई के पक्ष में हैं. लेकिन क्या वे यह बता सकते हैं कि उन्होंने कमज़ोर वर्गों के लिए अब तक क्या किया है? निजी क्षेत्र में कितने दलित काम कर रहे हैं? उद्योग समूह इस बारे में आँकड़े क्यों नहीं देते? हमारी जानकारी के मुताबिक ये संख्या नगण्य है."

 निजि क्षेत्र का कहना है कि वे स्वैच्छिक कार्रवाई के पक्ष में हैं. क्या वे ये बता सकते हैं कि उन्होंने कमज़ोर वर्गों के लिए अब तक क्या किया है? निजी क्षेत्र में कितने दलित काम कर रहे हैं? उद्योग समूह इस बारे में आँकड़े क्यों नहीं देते?
सीटू अध्यक्ष पाँधे

निजी क्षेत्र में आरक्षण देने से कार्यकुशलता पर असर पड़ने की बात को नकारते हुए पाँधे का कहना था कि ये एक भ्रम है.

सीटू के अध्यक्ष ने एक सवाल के जवाब में कहा, "यदि निजी क्षेत्र इतना कार्यकुशल है तो फिर देश में सात लाख निजी क्षेत्र के कारखाने बंद क्यों हुए हैं और एक लाख करोड़ रुपए का कर अब भी सरकार को क्यों नहीं अदा किया गया? क्या ये कार्यकुशलता का प्रतीक है?"

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