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बुधवार, 07 दिसंबर, 2005 को 14:37 GMT तक के समाचार
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ईपीएफ़ ब्याज़ दर घटकर 8.5 प्रतिशत
भविष्य निधि पर ब्याज़ दर घटाने की योजना का कर्मचारी विरोध कर रहे थे
भारत में वर्ष 2005-06 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि की ब्याज़ दर घटाने का फ़ैसला किया गया है.

अब ईपीएफ़ पर 9.5 प्रतिशत की जगह 8.5 प्रतिशत ब्याज़ दिया जाएगा.

भारत में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ़) बोर्ड ने दिल्ली में लगभग चार घंटे तक चली बैठक में ये महत्वपूर्ण निर्णय लिया.

बैठक की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय श्रम मंत्री चंद्रशेखर राव ने कहा कि साढ़े आठ प्रतिशत का ब्याज़ देने से हमें लगभग 370 करोड़ रूपए की अतिरिक्त आवश्यकता होगी.

 अतिरिक्त बोझ के कारण सरकारी ख़ज़ाने पर कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा. इसके लिए अतिरिक्त संसाधन खोजने का भार श्रम मंत्रालय पर होगा
के चंद्रशेखर राव, केंद्रीय श्रम मंत्री

उन्होंने कहा,"लेकिन इस अतिरिक्त बोझ के कारण सरकारी ख़ज़ाने पर कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा. इसके लिए अतिरिक्त संसाधन खोजने का भार श्रम मंत्रालय पर होगा".

भारत में लगभग चार करोड़ लोगों ने कर्मचारी भविष्य निधि के सदस्य हैं.

ईपीएफ़ की ब्याज़ दर को घटाने के पीछे एक प्रमुख कारण ये बताया जा रहा है कि 9.5 प्रतिशत ब्याज़ दर के समय वित्त वर्ष 2004-05 में ईपीएफ़ संगठन को 716 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था.

कर्मचारी संगठन कर्मचारी भविष्य निधि की ब्याज़ दर में किसी तरह के बदलाव का विरोध कर रहे थे.

गुरूवार को श्रम संगठन के प्रतिनिधि और केंद्रीय श्रम मंत्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात करनेवाले हैं.

विरोध

 हमने श्रम मंत्री को जो सहमति दी है उसमें कहा गया है कि वे प्रधानमंत्री और अन्य निकायों से ये प्रयास जारी रखें कि पिछले वर्ष की जो दर थी वो कम नहीं होनी चाहिए
डी एल सचदेव, श्रम संगठन एटक

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस को ये सहम एटक के सचिव डी एल सचदेव ने बीबीसी को बताया कि वे 8.5 प्रतिशत को अंतरिम ब्याज़ दर मानकर चल रहे हैं, जो बदल सकती है.

डी एल सचदेव ने कहा,"हमने श्रम मंत्री को जो सहमति दी है उसमें कहा गया है कि वे प्रधानमंत्री और अन्य निकायों से ये प्रयास जारी रखें कि पिछले वर्ष की जो दर थी वो कम नहीं होनी चाहिए."

कर्मचारी संगठनों ने माँग की थी कि ब्याज़ दर में कोई बदलाव न हो और उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से दख़ल देने की माँग की थी.

पिछली बार श्रम मंत्री और सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टीज़ (सीटीबी) के चेयरमैन के बीच हुई बैठक में यह वादा किया गया था कि ये मामला प्रधानमंत्री के पास ले जाया जाएगा.

कई श्रम संगठनों ने एक संयुक्त पत्र लिखकर श्रम मंत्री से मांग की थी कि ब्याज़ दर कम नहीं किया जाना चाहिए.

संगठनों की माँग थी कि विशेष जमा योजना और सरकारी बॉन्ड पर ब्याज़ बढ़ा देना चाहिए.

हालाँकि इस मामले पर वित्त और निवेश उप समिति ने सिफ़ारिश की थी कि कर्मचारी भविष्य निधि पर ब्याज दर घटाकर आठ प्रतिशत कर देना चाहिए.

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